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Craft Village Initiative : सरकार “Linking Textile with Tourism” पहल के एक भाग के रूप में प्रमुख पर्यटन स्थलों को हस्तशिल्प समूहों और बुनियादी ढांचे के समर्थन से जोड़ रही है। इसके संबंध में, गांवों के समग्र विकास के लिए 8 शिल्प ग्राम पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। इन गांवों में शिल्प संवर्धन और पर्यटन को आगे बढ़ाया जा रहा है।

8 शिल्प गांव

  1. रघुराजपुर (ओडिशा)
  2. तिरुपति (आंध्र प्रदेश)
  3. वदज (गुजरात)
  4. नैनी (उत्तर प्रदेश)
  5. अनेगुंडी (कर्नाटक)
  6. महाबलीपुरम (तमिलनाडु)
  7. ताज गंज (उत्तर प्रदेश)
  8. आमेर (राजस्थान)

ये क्राफ्ट विलेज हस्तशिल्प को समूहों में कारीगरों के लिए व्यावहारिक और पैसा कमाने वाले आजीविका विकल्प के रूप में बढ़ावा देगा। यह भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत की रक्षा करेगा। क्राफ्ट विलेज पहल से पूरे भारत में लगभग 1000 कारीगरों को लाभ होगा। इस कार्यक्रम ने इन शिल्प गांवों में पर्यटकों की आमद में भी वृद्धि की है।

शिल्प गांवों की अवधारणा

शिल्प के अधिकांश नमूने और शिल्पकारों को एक स्थान पर इकट्ठा करने के लिए एक शिल्प गांव की अवधारणा का मसौदा तैयार किया गया था। शिल्प गाँव में बुनियादी ढाँचे और वातावरण को गाँव की शैली में डिज़ाइन किया गया है ताकि भारत के ग्रामीण जीवन की भावना प्रदर्शित की जा सके। ये गांव एक बाजार के रूप में भी काम करते हैं, जहां कोई भी सामान्य बाजार की तुलना में कम कीमत पर कलाकृतियां खरीद सकता है।

भारत में शिल्प का महत्व

शिल्प भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये शिल्प देश के दूर-दराज क्षेत्रों में पनपते हैं। अधिकांश शिल्प परिवार और अतीत की विरासत के रूप में प्रचलित हैं। शिल्पकारों को शिल्प अपने पूर्वजों से विरासत में मिला है। सदियों से इस परंपरा का पालन किया जा रहा है।

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