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इसरो का EOS-03 लॉन्च फेल, तकनीकी गड़बड़ी के चलते पूरा नहीं हुआ मिशन

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) के अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS-03) की लॉन्चिंग फेल हो गई है। इस सैटेलाइट ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से गुरुवार की सुबह 5.43 बजे उड़ान तो भरी लेकिन तय समय से कुछ सैकेंड पहले तीसरे स्टेज (क्रायोजेनिक इंजन) में गड़बड़ी आने से यह ऑर्बिट में स्थापित नहीं हो सका। तकनीकी दिक्कतों के चलते मिशन कंट्रोल सेंटर को सिग्नल और डेटा मिलने बंद हो गए थे। इसके बाद इसरो के चेयरमैन के सिवन ने बताया कि मिशन पूरा नहीं हो सका। अब इसरो लॉन्च की नई तारीख का ऐलान जल्द करेगा।

क्या है अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट?

इस सैटेलाइट को जियो इमेजिंग सैटेलाइट-1 (GISAT-1) भी कहा जा रहा है। इसके जरिए भारत के साथ-साथ चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर भी नजर रखी जा सकेगी। इस वजह से इस सैटेलाइट को आई इन द स्काय भी कहा जा रहा है। अंतरिक्ष विभाग के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने हाल ही में राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS-03) पूरे देश की रोज 4-5 तस्वीरें भेजेगा। इस सैटेलाइट की मदद से जलाशयों, फसलों, तूफान, बाढ़ और फॉरेस्ट कवर में होने वाले बदलावों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। यह बड़े इलाके की रियल-टाइम इन्फॉर्मेशन देने में सक्षम है। यह बेहद खास है, क्योंकि अन्य रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट्स लोअर ऑर्बिट्स में हैं और वे नियमित इंटरवल के बाद एक स्पॉट पर लौटते हैं। इसके मुकाबले EOS-03 रोज चार-पांच बार देश की तस्वीर खींचेगा और विभिन्न एजेंसियों को मौसम और जलवायु परिवर्तन से संबंधित डेटा भेजेगा।

जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV)

GSLV इसरो का एक एक्सपेंडेबल लॉन्च सिस्टम है। 2001 से 2018 तक 13 लांच में इसका उपयोग किया गया है। GSLV, GSLV मार्क III से पूरी तरह से अलग है, भले ही वे नाम साझा करते हैं। GSLV परियोजना को पहली बार 1990 में भू-समकालिक उपग्रहों (geosynchronous satellites) के लिए भारतीय प्रक्षेपण क्षमता हासिल करने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था।

क्या GSLV PSLV के समान है?

GSLV पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) लॉन्च वाहनों के प्रमुख घटकों का उपयोग करता है। इसमें ठोस रॉकेट बूस्टर S125/S139 और तरल-ईंधन वाले विकास इंजन का उपयोग किया गया है। Geostationary Transfer Orbit (GTO) में उपग्रह को इंजेक्ट करने के लिए आवश्यक थ्रस्ट के लिए तीसरा चरण एक LOX/LH2 क्रायोजेनिक इंजन द्वारा संचालित है।

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