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जानिए, क्या है ग्लोबल मिनिमम टैक्स (Global Minimum Tax)?

Global Minimum Tax : बहुत सालों की मशक्कत के बाद आखिरकार जी-7 देश इस बार पर राजी हो गई हैं कि ग्लोबल मिनिमम टैक्स को न्यूनतम 15 फीसदी रखा जाएगा। इसके तहत ग्लोबल कॉरपोरेट टैक्स (global corporate tax) कम से कम 15 फीसदी होगा, जिसका भुगतान उसी देश में करना होगा, जहां पर व्यापार किया जा रहा है। अभी टैक्सेशन क्लीयर नहीं होने की वजह से कई देशों के नुकसान होता था। विकसित देशों को गूगल, एमेजॉन, फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों से बहुत कम टैक्स मिलता है। ग्लोबल मिनिमम टैक्स के लागू होने बाद उन पर भारत को 15 फीसदी तक का टैक्स लगाने की ताकत मिल जाएगी। आइए जानते हैं ग्लोबल मिनिमम टैक्स से जुड़ी अहम बातें।

क्यों जरूरत पड़ी ग्लोबल मिनिमम टैक्स की?

अधिकतर देश चाहते हैं कि वह मल्टीनेशनल कंपनियों की तरफ से अपना प्रॉफिट और टैक्स रेवेन्यू कम टैक्स वाले देशों में डायवर्ट करने को रोकें। यह कंपनियां सेल्स कहीं भी करें, प्रॉफिट को कम टैक्स वाले देश में डायवर्ट कर देते हैं। इस तरह दवाओं के पेटेंट, सॉफ्टवेयर और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी पर रॉयल्टी आदि से हुई कमाई पर कंपनियां अधिक टैक्स देने से बचते हुए उसे कम टैक्स वाले देश में डायवर्ट कर देती हैं। इससे अपनी कमाई को बचाने के लिए ग्लोबल मिनिमम टैक्स की जरूरत पड़ी है।

कहां तक पहुंची है बात?

ओईसीडी (OECD) यानी आर्थिक सहयोग और विकास संगठन सालों से 140 देशों के साथ टैक्स को लेकर बातचीत कर रहा है। ये बातचीत तमाम देशों के बीच डिजिटल सेवाओं पर टैक्स लगाने और साथ ही टैक्स चोरी को कोम रोकने के लिए चल रही है। इसके तहत ही ग्लोबल कॉरपोरेट मिनिमम टैक्स की बात भी हो रही है। ओईसीडी और जी-20 देश दोनों ही इस लेकर इसी साल के मध्य तक किसी फैसले पर पहुंच सकते हैं। इसके बाद कम टैक्स वाले देश एग्रीमेंट का विरोध नहीं कर पाएंगे। ओईसीडी का अनुमान है कि इसके बाद कंपनियों को दुनिया भर में 50-80 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त टैक्स चुकाना पड़ सकता है।

ग्लोबल मिनिमम टैक्स की दरें ओवरसीज प्रॉफिट पर लागू होंगी। सरकारें इसके बाद भी अपनी मर्जी से लोकल कॉरपोरेट टैक्स लगा सकेंगी, लेकिन अगर कंपनियां किसी देश में कम टैक्स चुकाती हैं तो उस कंपनी के देश की सरकार टैक्स को न्यूनतम रेट तक बढ़ा सकती है, जिससे कि प्रॉफिट को दूसरे देश में शिफ्ट कर के टैक्स बचाने को रोका जा सके। ओईसीडी ने पिछले ही महीने कहा था कि सरकारें बेसिक डिजाइन पर तो सहमत हैं, लेकिन दरों पर अभी समहति नहीं बनी है।

भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?

अब सबसे बड़ा और अहम सवाल ये है कि आखिर ग्लोबल मिनिमम टैक्स की दर 15 फीसदी न्यूनतम तय करने का भारत पर क्या असर होगा? अगर भारत में कोई ऐसी कंपनी है जो किसी कम टैक्स वाले देश को कमाई का भुगतान कर रही है तो भारत को अधिकार होगा कि वह इस कमाई पर टैक्स लगा सके, बशर्ते वह कमाई डिजिटल इनकम से जुड़ी हो। कम टैक्स वाले देशों में आयरलैंड, लग्जम्बर्ग और नीदरलैंड जैसे देश आते हैं।

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