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भारतीय किसान उर्वरक कोआपरेटिव (Indian Farmers Fertiliser Cooperative – IFFCO) जून 2021 में नाइट्रोजन उर्वरक आधारित नैनो यूरिया बाजार में लॉन्च करेगा। एक 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया सामान्य यूरिया के 45 किलोग्राम के बराबर है। 500 मिली यूरिया की कीमत करीब 240 रुपये है। इसके अलावा इससे किसानों की लागत में 15% की कमी आएगी और खेती से उपज में लगभग 20% की वृद्धि होगी।

नैनो यूरिया (Nano Urea) क्या है?

फसलों के पोषक तत्वों की दक्षता में सुधार के लिए नैनो-प्रौद्योगिकी (nano-technology) से उत्पादित यूरिया को नैनो यूरिया कहा जाता है। नैनो यूरिया का उत्पादन दो तरह से होता है:

  1. सबसे पहले क्विनहाइड्रोन (quinhydrone) मिश्रित अल्कोहल तैयार किया जाता है।
  2. फिर, इस मिश्रण को नैनो यूरिया बनाने के लिए कैल्शियम साइनामाइड ग्रेन्यूल्स (calcium cyanamide granules) पर फैलाया जाता है।

भारत में इसकी अनुमति कब दी गई थी?

नवंबर, 2020 में भारत में नैनो यूरिया के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी गई थी।

नैनो यूरिया का महत्व

भारत प्रति वर्ष 350 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उपयोग करता है। नैनो-यूरिया के उपयोग से यह खपत आधी हो जाएगी और सरकार द्वारा दी जाने वाली लगभग 600 करोड़ रुपये की सब्सिडी की बचत होगी। साथ ही, यह यूरिया के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करेगा।

भारतीय किसान उर्वरक को-आपरेटिव लिमिटेड (Indian Farmers Fertiliser Cooperative Limited – IFFCO)

इफको उर्वरकों के निर्माण और विपणन में शामिल बहु-राज्य सहकारी समिति है। इसकी स्थापना 1967 में हुई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। इसमें 57 सदस्य सहकारी समितियां शामिल हैं। इस प्रकार प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद पर कारोबार के हिसाब से यह दुनिया का सबसे बड़ा को-आपरेटिव है। यूरिया में इसकी 19% बाजार हिस्सेदारी है और जटिल उर्वरकों में 29% बाजार हिस्सेदारी है, जो इसे भारत का सबसे बड़ा उर्वरक निर्माता बनाती है।

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