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जयंती विशेष : आखिर कौन थे वीर सावरकर?

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानी और राष्ट्रवादी नेता विनायक दामोदर सावरकर की 28 मई को 138वीं जयंती मनायी जा रही है। इस उपलक्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर समेत कई लोगों ने सावरकर को नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी है। लेकिन क्या आपको पता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनसंघ के सदस्य न रहते हुए भी संघ परिवार में वीर सावरकर का नाम बहुत इज्जत और सम्मान के साथ लिया जाता है।

पूरे विश्व में भारत की एक सामूहिक “हिंदू” पहचान बनाने के लिए किया था यह काम

महाराष्ट्र के नासिक के निकट भागुर गांव में जन्मे वीर सावरकर एक वकील, राजनीतिज्ञ, कवि, लेखक और नाटककार थे। राजनीति में हिंदू राष्ट्रवाद की विचारधारा को विकसित करने में सावरकर का बहुत बड़ा योगदान माना जाता है। वो वीर सावरकर ही थे जिन्होंने पूरे विश्व में भारत की पहचान हिंदू के रूप में बनाने के लिए हिंदुत्व शब्द को गढ़ा था।

सावरकर के अनुसार यह थी हिंदुत्व की परिभाषा

सावरकर ने एक पुस्तक लिखी ‘हिंदुत्व-हू इज़ हिंदू?’ इस किताब में उन्होंने पहली बार राजनीतिक विचारधारा के तौर पर हिंदुत्व का इस्तेमाल किया था। वरिष्ठ पत्रकार नीलांजन मुखोपाध्याय ने एक साक्षात्कार के दौरान बताया था कि सावरकर के हिसाब से भारत में रहने वाला व्यक्ति मूलत: हिंदू है और यही हिंदुत्व शब्द की परिभाषा है। जिस व्यक्ति की पितृ भूमि, मातृभूमि और पुण्य भूमि भारत हो वही इस देश का नागरिक है। हालांकि, यह देश किसी की भी पितृ और मातृभूमि तो बन सकती है, लेकिन पुण्य भूमि नहीं।

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