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कर्नाटक के मेकेदातु में कावेरी नदी पर एक जलाशय के निर्माण में मानदंडों के कथित उल्लंघन पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal – NGT) द्वारा एक समिति का गठन किया गया है। न्यायमूर्ति के. रामकृष्णन (K. Ramakrishnan) की एनजीटी पीठ ने बांध के संबंध में अखबार की रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्नाटक कावेरी नदी पर एक बांध बनाने का प्रस्ताव कर रहा है, जबकि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (Cauvery Water Management Authority) द्वारा इस प्रस्ताव को तमिलनाडु सरकार के विरोध के कारण दो बार टाल दिया गया था।

समिति के बारे में

कावेरी नीरावरी निगम लिमिटेड; MoEF, बैंगलोर के एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य इस समिति के सदस्य हैं। एनजीटी ने समिति को यह पूछने का निर्देश दिया है कि क्या वन विभाग और MoEF से वन संरक्षण अधिनियम और EIA अधिसूचना, 2006 के तहत आवश्यक मंजूरी प्राप्त करने से पहले यह कथित निर्माण गतिविधि शुरू की गई है।

मेकेदातु परियोजना (Mekedatu Project)

इस परियोजना को 2017 में कर्नाटक द्वारा मंज़ूरी दी गयी थी। 9,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य बेंगलुरु शहर के लिए पीने के पानी का भंडारण और आपूर्ति करना था। इससे 400 मेगावाट बिजली भी पैदा होगी। यह परियोजना कावेरी नदी और उसकी सहायक अर्कावती (Arkavathi) नदी के संगम पर स्थित गहरी घाटी में क्रियान्वित की जा रही है।

तमिलनाडु इस परियोजना का विरोध क्यों कर रहा है?

तमिलनाडु ऊपरी तट पर किसी भी प्रस्तावित परियोजना का विरोध करता है जब तक कि इसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मंज़ूर नहीं किया जाता है। इसके अलावा, कर्नाटक ने बिना सहमति और मंजूरी के परियोजना शुरू की जो कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (Cauvery Water Disputes Tribunal – CWDT) के अंतिम आदेश के खिलाफ है।

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