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जानें, Manipur सरकार ने क्यों लिया एम्बुलेंस के सायरन बंद रखने का फैसला?

मणिपुर सरकार (Manipur Government) की तरफ से एक सर्कुलर जारी किया गया है, जिसमें सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों, अस्पतालों और एम्बुलेंस संचालकों से एम्बुलेंस के सायरन (Ambulance Siren) को बंद करने को कहा गया है। सरकार का कहना है कि एम्बुलेंस के सायरन से लोगों में डर बढ़ रहा है, और सामाजिक चिंता व्याप्त हो रही है।

सड़क जाम होने पर ही बजाएं सायरन

इस सर्कुलर में लिखा है कि अगर कोई एम्बुलेंस किसी मरीज को लेकर अस्पताल जा रही है, तो इस स्थिति में एम्बुलेंस का सायरन तभी बजाया जाए जब सड़कों पर ट्रैफिक जाम हो। अगर सड़कें खाली हैं तो एम्बुलेंस का सायरन बजाने की कोई आवश्यकता नहीं है। मणिपुर सरकार के इस आदेश की अब पूरे देश में चर्चा हो रही है और लोग कह रहे हैं कि ये फैसला दूसरे राज्यों में भी लागू होना चाहिए।

एम्बुलेंस के सायरन को लेकर कानून क्या कहता है?

एम्बुलेंस इमरजेंसी व्हीकल की श्रेणी में आती है और इस श्रेणी में आने वाले वाहनों को कानून के तहत सायरन बजाने की अनुमति होती है। सायरन बजाने का मकसद एक ही होता है और वो ये कि सड़क पर एम्बुलेंस को आसानी से रास्ता मिल सके। अगर कोई व्यक्ति एम्बुलेंस सायरन सुनने के बाद भी उसे रास्ता नहीं देता है या उसे ओवरटैक करता है तो उस पर मोटर व्हीकल एक्ट 2019 के तहत 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। ये जुर्माना सभी इमरजेंसी व्हीकल के लिए है।

क्यों बनाया गया एम्बुलेंस पर सायरन का कानून?

हालांकि ऐसा नहीं है कि एम्बुलेंस का सायरन जानबूझकर लोगों को डराने के लिए बजाया जाता है। एक रिसर्च के मुताबिक भारत में 10 में से एक मरीज की मौत इसलिए हो जाती है क्योंकि एम्बुलेंस मरीज के पास देर से पहुंचती है, और इस देरी का सबसे बड़ा कारण है ट्रैफिक जाम। इसी ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए एम्बुलेंस को सायरन बजाने की छूट कानून देता है। यानी ये कानून लोगों की जान बचाने के लिए ही है।

 

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