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फिलिस्तीन के उग्रवादी समूहों में हमास सबसे बड़ा और प्रभावशाली

एक बार फिर हमास का नाम उभर कर सामने आया है। फिलिस्तीन के कई उग्रवादी इस्लामी समूहों में हमास सबसे बड़ा और प्रभावशाली है। इसका असली नाम इस्लामिक रजिस्टेंस मूवमेंट है और यह 1987 में पहले इंतिफादा (विद्रोह) के बाद एक आंदोलन के रूप में सामने आया था। हमास ने फिलिस्तीन की राजनीतिक प्रक्रिया में भी मौजूदगी दर्ज कराई है। गाजा पर हमास का शासन है। हमास ने 2006 में फिलिस्तीनी चुनाव जीते थे, जिसके बाद संगठन ने 2007 में फतह पार्टी की अध्यक्षता वाली फिलिस्तीनी अथॉरिटी की सेना को गाजा पट्टी से बाहर कर दिया था। इसके बाद से ही इस्राइल और मिस्र ने गाजा की नाकेबंदी कर दी। दोनों देशों ने गाजा पट्टी से सामान और लोगों के आने-जाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इस्राइल के साथ हमास का मिलिट्री विंग ‘कसम ब्रिगेड’ तीन युद्ध भी लड़ चुका है। 1993 में इस्राइल और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (पीएलओ) के बीच पहला ऑस्लो शांति समझौता हुआ था। फिर 1995 में दूसरा समझौता हुआ। लेकिन हमास ने 1996 की फरवरी और मार्च में इस्राइल में एक के बाद एक सुसाइड बॉम्बिंग की, जिसकी वजह से माना जाता है कि इस्राइल के लोग शांति समझौतों के खिलाफ हो गए। दक्षिणपंथी नेता बेंजामिन नेतन्याहू भी उसी साल प्रधानमंत्री बने। नेतन्याहू शांति समझौते के सख्त खिलाफ थे। सुसाइड बॉम्बिंग से पहले तक नेतन्याहू की जीत के आसार कम थे।

रहने लायक नहीं है गाजा

गाजा को गाजा पट्टी इसलिए ही कहते हैं, क्योंकि वह जमीन का एक छोटा टुकड़ा भर है। कुल मिलाकर गाजा पट्टी 40 किलोमीटर लंबी और लगभग 8-10 किलोमीटर चौड़ी है, लेकिन यह इलाका तेल अवीव या लंदन, शंघाई जैसे शहरों से भी ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाला है। इस छोटे से इलाके की जनसंख्या 20 लाख से ज्यादा है। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर वाले इलाकों में गाजा भी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि लगभग 80 फीसदी आबादी जिंदा रहने और बुनियादी सुविधाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद पर निर्भर है।

कैसे कायम है गाजा?

हमास को अमेरिका, यूके, यूरोपियन यूनियन समेत कई देश आतंकी संगठन मानते हैं। इसलिए सीधे उसे वित्तीय और मानवीय मदद देने की बजाय ज्यादातर देश यूएनआरडब्ल्यूए के जरिए गाजा तक मदद पहुंचाते हैं। खाद्य, राहत, चिकित्सा संबंधी सामग्री गाजा में पहुंचाने के लिए इस्राइल ने एक कॉरिडोर बना रखा है। गाजा तीन तरफ से इस्राइल से घिरा हुआ है। एक बहुत छोटी सी सीमा मिस्र से भी मिलती है। साल 2000 में हुए दूसरे इंतिफादा (विद्रोह) के बाद से गाजा के आयत-निर्यात में भारी कमी आई है। इस सबके बीच गाजा में ‘टनल इकनॉमी’ फल-फूल रही है। गाजा में मिस्र से गैरकानूनी तरीके से सामान लाने के लिए सैंकड़ों-हजारों टनल बनाई गई हैं।ये टनल हमास के नियंत्रण में हैं। हालांकि, अमेरिका इस्राइल का साथी है, फिर भी वो लाखों-करोड़ों डॉलर की मदद फिलिस्तीन भेजता है। सुन्नी मुसलमानों का समूह होने के बावजूद हमास को अरब देश ज्यादा पसंद नहीं करते हैं। सिर्फ कतर ही ऐसा देश है, जो हमास को सभी तरह की मदद देता है। इस साल कतर ने गाजा को दी जाने वाली मदद को 360 मिलियन डॉलर कर दिया था।

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