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शिवाजी महाराज को भारत के एक महान योद्धा और कुशल रणनीतिकार के रूप में भी जाना जाता है। वीर शिवाजी ने गोरिल्ला वॉर की एक नई शैली विकसित की थी जो आज भी भारतीय सेना द्वारा प्रयोग किया जाता हैं। शिवाजी महाराज ने अपने कार्यकाल में फारसी की जगह मराठी और संस्कृत को अधिक प्राथमिकता दी थी। उन्होंने कई वर्षों तक मुगल शासक औरंगजेब से लड़ाई लड़ी थी।

देशभर में 19 फरवरी को छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाई जा रही हैं। भारतीय इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है वीर शिवाजी महाराज की गौरव गाथा आज भी सुनाई जाती है। इस वर्ष छत्रपति शिवाजी महाराज की 391वीं जयंती मनाई जा रही है। 19 फरवरी, 1630 को वीर शिवाजी का जन्म शाहजी भोसले और जीजाबाई के यहां हुआ था।

शिवाजी के बचपन का नाम शिवाजी भोंसले था। बाद में साल 1674 में उन्हें औपचारिक रूप से छत्रपति या मराठा साम्राज्य के सम्राट के रूप में ताज पहनाया गया। शिवाजी के बारे में कहा जाता है कि वे सिर्फ 50 साल जिए, जिसमें से उनका सार्वजनिक जीवन सिर्फ 36 साल का है। 14 वर्ष की उम्र में लोकजीवन में कदम रखा। इन 36 सालों में उन्होंने सिर्फ 6 साल ही युद्ध लड़े होंगे। बाकी के 30 उन्होंने बेहतर शासन किया।

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छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती का इतिहास

छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती मनाने की शुरुआत साल 1870 में पुणे में महात्मा ज्योतिराव फुले ने की थी। ज्योतिराव फुले ने पुणे से करीब 100 KM दूर रायगढ़ में शिवाजी महाराज की समाधि की खोज की थी। बाद में स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने जयंती मनाने की परंपरा को आगे बढ़ाया। उनका वीरता और योगदान हमेशा लोगों को हिम्मत देता रहे, इसीलिए हर साल यह जयंती मनाई जाती है।

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वीर शिवाजी और युद्ध का संक्षिप्त विवरण

वर्ष 1670 में मुगलों की सेना के साथ उन्होंने जमकर लोहा लिया था। मुगलों को हराकर सिंहगढ़ के किले पर अपना परचम लहराया था। इसके बाद 1674 में उन्होंने ही पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी थी। साल 1656-57 में मुगलों की लड़ाई पहली बार शिवाजी महाराज से हुई थी। उन्होंने मुगलों की ढेर सारी संपत्ति और सैकड़ों घोड़ों पर अपना कब्जा जमा लिया था। कहा जाता है 1680 में कुछ बीमारी की वजह से अपनी राजधानी पहाड़ी दुर्ग राजगढ़ में छत्रपति शिवाजी की मृत्यु हो गई थीं इसके बाद उनके बेटे संभाजी उत्तराधिकारी घोषित किए गए थे।

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