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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को 2021-22 के लिए बजट पेश करेंगी। इस बार का बजट खास है, क्योंकि ऐसा पहली बार है, जब बजट दस्तावेज की छपाई नहीं हुई है। अर्थात बजट पूरी तरह डिजिटल फार्मेट में होगा। सामान्यत: बजट तैयार करने की प्रक्रिया 5 महीने पहले से ही शुरू हो जाती है और कई अहम बैठकों के बाद इसे तैयार किया जाता है।

बजट

जिस तरह से हमें अपने घर को चलाने के लिए एक बजट की जरूरत होती है, उसी तरह से देश को चलाने के लिए भी बजट की जरूरत पड़ती है। हम अपने घर का जो बजट बनाते हैं, वो आमतौर पर महीनेभर का होता है। इसमें हम हिसाब-किताब लगाते हैं कि इस महीने हमने कितना खर्च किया और कितना कमाया। इसी तरह से देश का बजट भी होता है। इसमें सालभर के खर्च और कमाई का लेखा-जोखा होता है।

बजट में क्या-क्या होता है?

बजट में सरकार तीन तरह के आंकड़े बताती है। ये होते हैं- बजट अनुमान, संशोधित अनुमान और वास्तविक।

  •  बजट अनुमान: ये अगले साल के लिए प्रारूप होता है। इसमें सरकार 2021-22 में होने वाली कमाई और खर्च का अनुमान बताएगी।
  •  संशोधित अनुमान: ये बीते साल का लेखा—जोखा होता है। इस बार जो बजट पेश होगा, उसमें 2020-21 का रिवाइज्ड एस्टिमेट बताया जाएगा। यानी पिछले बजट में सरकार ने जो अनुमान लगाया था, उस अनुमान के हिसाब से उसकी कितनी कमाई और कितना खर्च हुआ। रिवाइज्ड एस्टिमेट बजट एस्टिमेट से कम-ज्यादा भी हो सकता है।
  •  वास्तविक: ये दो साल पहले का होता है। इस बार बजट में 2019-20 का एक्चुअल बजट बताया जाएगा। यानी 2019-20 में सरकार को असल में कितनी कमाई हुई और कितना खर्च हुआ।

बजट से पहले क्या-क्या होता है?

बजट की तैयारी 5 महीने पहले से शुरू हो जाती है। सामान्यत: सितंबर में आर्थिक मामलों के विभाग की बजट डिविजन सभी मंत्रालयों, विभागों, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को सर्कुलर जारी करती है। इसमें उनसे आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए उनके खर्चों का अनुमान लगाते हुए जरूरी फंड बताने के लिए कहा जाता है। इसके बाद अक्टूबर-नवंबर में वित्त मंत्रालय दूसरे मंत्रालयों-विभागों के अधिकारियों के साथ मीटिंग करते हैं और ये तय करते हैं कि किस मंत्रालय या विभाग को कितनी रकम दी जाए। मीटिंग में तय होने के बाद एक ब्लूप्रिंट तैयार किया जाता है।

सबकुछ तय होने के बाद बजट डॉक्यूमेंट की छपाई होती है। लेकिन इस बार छपाई नहीं होगी। बजट पेश होने से करीब एक हफ्ते पहले वित्त मंत्रालय में हलवा सेरेमनी होती है। इसके बाद सभी संबंधित अधिकारियों को वित्त मंत्रालय में ही ठहराया जाता है और किसी बाहरी व्यक्ति से संपर्क नहीं करने दिया जाता। जब बजट पेश हो जाता है, तभी अधिकारियों को बाहर आने दिया जाता है।

इकोनॉमिक सर्वे

इकोनॉमिक सर्वे को आसान भाषा में डायरी भी कह सकते हैं। जिस तरह हम अपने घर में एक डायरी मेंटेन करते हैं और इस डायरी में हम अपने पूरे साल भर के खर्च, कमाई, बचत का हिसाब-किताब लगाते हैं और इससे ही अंदाजा लगाते हैं कि आने वाले वक्त में कैसे खर्च करना है, कैसे कमाना है और कैसे बचाना है। इकोनॉमिक सर्वे भी ठीक इसी तरह होता है।

1 फरवरी को बजट पेश होने से एक दिन पहले इकोनॉमिक सर्वे पेश किया जाता है। हालांकि, इस बार इकोनॉमिक सर्वे बजट से दो दिन पहले 29 जनवरी को पेश हो गया। इकोनॉमिक सर्वे यानी आर्थिक सर्वेक्षण में बीते साल का लेखा-जोखा और आने वाले साल के लिए सुझाव, चुनौतियां और समाधान होते हैं। इकोनॉमिक सर्वे को आर्थिक मामलों के विभाग की इकोनॉमिक डिवीजन चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर की देख-रेख में तैयार करती है। इस वक्त CEA डॉक्टर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम हैं। पहला इकोनॉमिक सर्वे 1950-51 में पेश किया गया था। 1964 तक इसे बजट के साथ ही पेश किया जाता था। लेकिन बाद में इसे बजट से एक दिन पहले पेश किया जाने लगा।

संसद में बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी होती है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाता है और उसके बाद संसद के दोनों सदनों में इसे पेश किया जाता है।

बजट पेश होने के बाद

बजट पेश होने के बाद इसे संसद के दोनों सदनों यानी लोकसभा और राज्यसभा में पास कराना होता है। दोनों सदनों से पास होने के बाद 1 अप्रैल से ये लागू हो जाता है। हमारे देश में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है।

भारत का पहला बजट

भारत का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश सरकार के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने पेश किया था। आजादी के बाद पहला बजट देश के पहले वित्तमंत्री आरके षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था। यह बजट 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक की अवधि के लिए था। 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र की स्थापना के बाद पहला बजट 28 फरवरी 1950 को जॉन मथाई ने पेश किया गया था।

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