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कोरोना काल में लाकडाउन के बाद वाहनों की गति पर ब्रेक लगा था, जिससे लगभग सभी राजधानियों एवं शहरों की वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ था। जिसके बाद अंदाजा लगाया जा रहा था कि भारत ने एक तरह से प्रदूषण पर अंकुश लगा लिया है। लेकिन, वर्तमान में गिरते तापमान के बीच शहर में प्रदूषण की स्थिति अब जानलेवा हो चली है। सोमवार को 482 एक्यूआई के साथ मानेसर प्रदूषण के मामले में पहले पायदान पर रहा।  देशभर के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची में गुरुग्राम व गाजियाबाद संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे। सोमवार को गुरुग्राम का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) जनवरी के बाद सर्वोच्च 482 के स्तर पर पहुंच गया।

स्थिति इतनी खराब हो गई कि शाम 5 बजे ही रात का नजारा लग रहा था। प्रदूषण में बेतहाशा बढ़ोतरी होने के कारण सोमवार को लोगों को आंखों में जलन व सांस लेने में तकलीफ हुई।

प्रदूषण

प्रदूषण पर्यावरण में हानिकारक पदार्थों के प्रवेश के कारण प्राकृतिक संतुलन में पैदा होने वाले दोष/असंतुलन को कहा जाता हैं। प्रदूषक पर्यावरण को और जीव-जन्तुओं को नुकसान पहुंचाते हैं। प्रदूषण का सजीवों पर प्रत्यक्ष रूप से विपरीत प्रभाव पड़ता है।

एयर क्वालिटी इंडेक्स

प्रदूषण की समस्या मापने के लिए एयर क्वालिटी इंडेक्स का उपयोग किया जाता है। यह इंडेक्स बताता है कि हवा में पीएम-10, PM2.5, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) सहित 8 प्रदूषकों की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तय किए गए मानकों के तहत है या नहीं।

एयर क्वालिटी इंडेक्स के मानक

एयर क्वालिटी इंडेक्स को 0-50 के बीच ‘बेहतर’, 51-100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘सामान्य’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है। वहीं, हवा में पीएम 10 का स्तर 100 और पीएम 2.5 60 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

पीएम -10

पीएम 10 को पर्टिकुलेट मैटर कहा जाता है। इन कणों का साइज 10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास का होता है। इसमें धूल, गर्दा और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं। पीएम 10 और 2.5 धूल, कंस्‍ट्रक्‍शन और कूड़ा व पराली जलाने से ज्यादा बढ़ता है।

पीएम 2.5

पीएम 2.5 हवा में घुलने वाला छोटा पदार्थ है। इन कणों का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। पीएम 2.5 का स्तर ज्यादा होने पर ही धुंध बढ़ जाती है। इससे दृश्यता का स्तर भी गिर जाता है।

एक नजर में

  • लांसेंट की रिसर्च के आधार पर मंत्रालय ने कहा कि वायु प्रदूषण के कारण भारत में औेसत आयु 1.7 वर्ष कम हो जाती है।

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