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भारत विश्व का सबसे बड़ा जैसे लोकतांत्रिक देश में चुनाव हमेशा ही एक जटल प्रक्रिया रहा हैं। इसे संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का प्रयोग करता है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसका उपयोग मतदाता अपनावोट डालने के लिए करते है। ईवीएम का लक्ष्य चुनावी प्रक्रिया को सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना होता है।

ईवीएम पहली बार

भारत में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का प्रयोग पहली बार वर्ष 1982 में केरल चुनाव में हुआ था। ईवीएम के कारण वोटिंग प्रक्रिया आसान एवं कम समय में हो जाती है।

ऐसे काम करता है ईवीएम

ईवीएम के दो हिस्से होते हैं। इसमें से एक हिस्सा नियंत्रण के रूप में काम करता है जो मतदान अधिकारी के पास रहता है। वहीं इसका दूसरा हिस्सा मतदान ईकाई के रूप में काम करता है जिसे मतदान कक्ष के अंदर रखा जाता है। सबसे पहले मतदान अधिकारी मतदान बटन को दबाता है जिसके बाद मतदान कक्ष में उपस्थित मतदाता अपने पसंदीदा प्रत्याशी का चुनाव उसके पार्टी चिन्ह के सामने लगे नीले बटन को दबाकर करता है।

मशीन के दोनों ही भाग एक लंबे इलेक्ट्रॉनिक तार के माध्यम से जुड़े होते है। ईवीएम मशीन के बटन को एक ही बार दबाया जा सकता है क्योंकि मतदान केंद्र पर उम्मीदवार के नाम के आगे के बटन को एक बार दबाने के बाद यह मशीन बंद हो जाती है। यदि कोई मतदाता दो बटन एक साथ दबाने का प्रयास करता है तो मतदान दर्ज नहीं होता है।

वर्तमान समय में ईवीएम में सुधारों के मतदाता वोट डालने के आप पर्ची के जरिए अपना मत भी देख सकते है कि उनका वोट उनके प्रत्याशी को गया है कि नहीं। इस मशीन को वीवीपैट कहा जाता है। यह चुनाव प्रक्रिया को पारदशी बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

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