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FATF: क्‍या है एफएटीएफ और ग्रे सूची, पाकिस्‍तान क्यों है इस सूची में?

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यदि कोई देश एफएटीएफ की ‘ग्रे लिस्ट’ में बना रहता है या उसे ‘डार्क ग्रे’ लिस्ट में डाल दिया जाता है तो उसके लिए अंतराष्‍ट्रीय मुद्राकोष विश्‍व बैंक और यूरोपीय संघ से आर्थिक मदद हासिल करना मुश्किल हो जाता है।

एफएटीएफ आतंकियों को ‘पालने-पोसने’ के लिए पैसा मुहैया कराने वालों पर नजर रखने वाली संंस्‍था है। फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स यानी एफएटीएफ ने पाकिस्तान को हाल ही में ग्रे लिस्‍ट में बनाए रखने की सिफारिश की है। तुर्की और मलेशिया के समर्थन के बावजूद वह इस सूची से निकल पाने में नाकाम रहा है। एफएटीएफ ने पाया है कि पाकिस्‍तान टेरर फंडिंग पर अंकुश लगाने में विफल साबित हुआ है।

एफएटीएफ

एफएटीएफ टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्‍था है। दूसरे शब्‍दों में कहें तो यह आतंकियों को ‘पालने-पोसने’ के लिए पैसा मुहैया कराने वालों पर नजर रखने वाली एजेंसी है। कोई भी देश इसकी ‘ग्रे लिस्‍ट’ में नहीं आना चाहता है। इसकी ग्रे लिस्‍ट में आने का सीधा मतलब है, देश पर आर्थिक पाबंदी से लागू हो जाना

एफएटीएफ का मकसद

एफएटीएफ का गठन 1989 में हुआ था। अंतराराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाए रखना इसका मकसद है। यह अपने सदस्य देशों को टेरर फाइनेंसिंग और मनी लॉन्ड्र‍िंग जैसी गतिविधियों में शामिल होने से रोकता है।

पाकिस्‍तान और एफएटीएफ

जून 2018 में ही एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला था और 27 प्‍वॉइंट का एक्शन प्लान देते हुए एक साल का समय दिया था। इससे निकलने के लिए पाकिस्‍तान को टेरर फाइनेंसिंग और मनी लाउंड्रिंग रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने थे। एफएटीएफ ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान को फरवरी 2021 तक बचे हुए छह पॉइंट पर काम करके दिखाना होगा। पाकिस्तान ने जिन छह कार्यों को पूरा नहीं किया है उनमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर और लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल होना भी शामिल है। पिछले तीन दिनों में एफएटीएफ का डिजिटल पूर्ण सत्र आयोजित हुआ जिसमें फैसला लिया गया कि पाकिस्तान उसकी ग्रे लिस्ट में बना रहेगा। पाकिस्तान आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए कुल 27 कार्ययोजनाओं में से छह को पूरा करने में अब तक विफल रहा है और इसके परिणामस्वरूप यह देश एफएटीएफ की ग्रे सूची में बना रहेगा।  ईरान और उत्तरी कोरिया पहले से इस लिस्ट में हैं।

एक नजर में

  • एफएटीएफ का गठन 1989 में हुआ था।
  • एफएटीएफ का मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पेरिस में है।
  • मार्कस प्लेयर इसके प्रे​सिडेंट है।
  • एफएटीएफ का पूरा रूप फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स होता है।

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