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Ram-Vilas-Paswan: 5 दशक तक भारत की राजनीति के मौसम वैज्ञानिक, रामविलास पासवान के बारे में सबकुछ

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लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का गुरुवार यानि 8 अक्टूबर 2020 को देर शाम दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल में निधन हो गया। वे 74 वर्ष के थे। रामविलास पासवान लंबे समय से बीमार चल रहे थे। शनिवार को उनके हार्ट/हृदय की सर्जरी हुई थी।

रामविलास पासवान बिहार की राजनीति में पांच दशक से एक मजबूत स्तंभ बने रहे। खगड़िया के शहरबन्नी गांव में एक साधारण परिवार में जन्मे रामविलास पासवान ने छात्रसंघ से राजनीति में कदम रखा था। वह जेपी आंदोलन में बिहार में मुख्य किरदार में से एक थे। वे देश के दलितों के साथ सबके हित की बात सोचते एवं करते थे। वर्ष 1969 में वे बिहार पुलिस में डीएसपी के पद को लात मार दी थी। नौकरी छोड़कर पहली बार विधायक बने थे।

क्यों कहा जाता था मौसम वैज्ञानिक

राज​नीतिक गलियारों में उन्हें अक्सर मौसम वैज्ञानिक के नाम से संबोधित किया जाता था। वे कोई मौसम वैज्ञानिक नहीं थे लेकिन राजनीति पर उनकी पकड़ एवं समय को भाप लेने की क्षमता के कारण ऐसा कहा जाता था। केंद्र में एनडीए भाजपा गठबंधन की सरकार हो या यूपीए कांग्रेस गठबंधन की, उनका महत्व समान रूप से बना रहा। राजद सुप्रिमो लालू प्रसाद यादव ने उनको ‘मौसम विज्ञानी’ का नाम दिया था।

रिकार्ड

वर्ष 1977 में पहली बार सर्वाधिक मतों से जीतने का विश्व रिकॉर्ड के साथ लोकसभा सदस्य चुने गए। इस चुनाव में वह हाजीपुर सीट से करीब 89% वोट पाकर लोकसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। केंद्र में एनडीए की सरकार हो या यूपीए की, उनका महत्व समान रूप से बना रहा। उन्होंने लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक मतों से जीतने का विश्व रिकॉर्ड भी कायम किया। रामविलास पासवान देश के छह प्रधानमंत्रियों की कार्यकाल में मंत्री रहे।

ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर

‘ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर’ इस कहावत को चरितार्थ करने वाले रामविलास पासवान छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुके थे। 1996 से 2015 तक केन्द्र में सरकार बनाने वाले सभी राष्ट्रीय गठबंधन चाहे यूपीए हो या एनडीए, का वह हिस्सा बने रहें। इसी कारण राजद सुप्रिमो लालू प्रसाद यादव ने उनको ‘मौसम विज्ञानी’ का नाम दिया था। रामविलास पासवान खुद भी स्वीकार कर चुके थे कि वह जहां रहते हैं सरकार उन्हीं की बनती है। मतलब राजीतिक मौसम का पुर्वानुमान लगाने में वे माहिर थे। वे समाजवादी पृष्ठभूमि के बड़े नेताओं में से एक थे। देशभर में उनकी पहचान राष्ट्रीय नेता के रूप में रही। हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से वह कई बार चुनाव जीते, लेकिन दो बार उन्होंने सबसे अधिक वोट से जीतने का रिकॉर्ड बनाया।

2005 बिहार विधानसभा चुनाव

वर्ष 2005 में बिहार की सत्ता की चाबी रामविलास पासवान के हाथ में थी। उस समय उनकी पार्टी के 29 विधायक जीतकर आए थे। किसी दल को बहुमत नहीं होने के कारण सरकार नहीं बन रही थी। पासवान अगर उस समय नीतीश कुमार के साथ या लालू प्रसाद के साथ जाते तो प्रदेश में सरकार बन सकती थी। मगर उन्होंने शर्त रख दी कि जो पार्टी अल्पसंख्यक को मुख्यमंत्री बनाएगी उसी का साथ वह देंगे। उनकी इस शर्त पर कोई खरा नहीं उतरा और दोबारा चुनाव में जाना पड़ा। बाद में उसी साल नवम्बर में हुए चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए को बहुमत मिला और सरकार बनाई।

2009 में हार गए थे लोकसभा चुनाव

रामविलास पासवान 2004 के लोकसभा चुनाव जीते, पर 2009 में हार गए। 2009 में पासवान ने लालू प्रसाद की पार्टी राजद के साथ गठबंधन किया। पूर्व गठबंधन सहयोगी कांग्रेस को छोड़ दिया। 33 वर्षों में पहली बार वे हाजीपुर से जनता दल के रामसुंदर दास से चुनाव हार गए। उनकी पार्टी लोजपा 15वीं लोकसभा में कोई भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी।  उस समय लालू के सहयोग से वह राज्यसभा में पहुंच गये। बाद में हाजीपुर क्षेत्र से 2014 के चुनाव में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वह फिर से एनडीए में आ गए और संसद में पहुंकर मंत्री बने। उसी चुनाव में बेटा चिराग भी पहली बार जमुई से सांसद बनें।

कब—कब किन पदों पर रहें

वर्ष 1975 में जब भारत में आपातकाल की घोषणा की गई तो रामविलास पासवान को गिरफ्तार कर लिया गया। 1977 में रिहा होने पर वे जनता पार्टी के सदस्य बन गए और पहली बार इसके टिकट पर हाजीपुर से संसद पहुंचे और उन्होंने सबसे अधिक अंतर से चुनाव जीतने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया। वे 1980 और 1984 में हाजीपुर निर्वाचन क्षेत्र से 7वीं लोकसभा के लिए चुने गए। 1983 में उन्होंने दलित मुक्ति और कल्याण के लिए एक संगठन दलित सेना की स्थापना की। 1989 में लोकसभा के लिए फिर से चुने गए और उन्हें विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में केंद्रीय श्रम और कल्याण मंत्री बने। उसी समय मंडल आयोग की सिफारिशें लागू की गईं। 1996 में उन्होंने लोकसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन का भी नेतृत्व किया, क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा राज्यसभा के सदस्य थे। उसी साल वे पहली बार केंद्रीय रेल मंत्री बने। उन्होंने 1998 तक उस पद को संभाला। इसके बाद वे अक्टूबर 1999 से सितंबर 2001 तक केंद्रीय संचार मंत्री रहे, जब उन्हें कोयला मंत्रालय में स्थानांतरित किया गया और वे इस पद पर अप्रैल 2002 तक बने रहे। मगर इसी बीच 2000 में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) बनाने के लिए वे जनता दल से अलग हो गए। 2004 के लोकसभा चुनावों के बाद पासवान यूपीए में शामिल हो गए और यूपीए सरकार में उन्हें रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री बनाया गया। ये कुल 8 बार सांसद रहें है जिसमें 6 बार लोकसभा एवं 2 बार राज्यसभा सांसद रहें है।

1989 में पहली बार केन्द्रीय श्रम मंत्री
1996 में रेल मंत्री
1999 में संचार मंत्री
2002 में कोयला मंत्री
2014 में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री
2019 में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री

व्यक्तिगत जीवन

रामविलास पासवान का जन्म 5 जुलाई 1946 को हुआ था। उनका पैतृक गांव खगड़िया जिले के अलौली स्थित शहरबन्नी है। उनकी शादी 1960 में राजकुमारी देवी के साथ तथा तलाक देने के बाद 1981 में दूसरी शादी 1983 में रीना शर्मा से हुई। उनकी दोनों पत्नियों से तीन बेटियां और एक बेटा है। लोकजनशक्ति पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष एवं जमुई से सांसद चिराग पासवान इनके इकलौते पुत्र है। उन्होंने कोसी कॉलेज खगड़िया और पटना यूनिवर्सिटी से शिक्षा ग्रहण की थी। पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने एमए और लॉ ग्रेजुएट की डिग्री ली। ये हाजीपुर और रोसड़ा से सांसद रहें है।

बड़े फैसले

हाजीपुर में रेलवे का जोनल कार्यालय की स्थापना
केन्द्र में अंबेडकर जयंती पर छुट्टी घोषित कराना

इन प्रधानमंत्री के कार्यकाल में मंत्री रहें

विश्वनाथ प्रताप सिंह, एच.डी. देवगौड़ा, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह, और नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला

 

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