azerbaijan-theedusarthi
Azerbaijan: अजरबैजान के बारें में जानें सबकुछ
October 3, 2020
upsssc-theedusarthi
UPSSSC : कनिष्ठ सहायक भर्ती 2017 में इंटरव्यू के लिए अनुपस्थित अभ्यर्थियों को एक और अवसर
October 3, 2020

आर्मेनिया पश्चिम एशिया और यूरोप के काकेशस क्षेत्र में स्थित एक पहाड़ी देश है जो चारों तरफ़ ज़मीन से घिरा हुआ है। 1990 के पूर्व यह सोवियत संघ का भाग था जो एक राज्य के रूप में था। सोवियत संघ में एक जनक्रान्ति एवं राज्यों के आजादी के संघर्ष के बाद आर्मीनिया को 23 अगस्त 1990 को स्वतंत्रता मिली परन्तु इसके स्थापना की घोषणा 21 सितंबर, 1991 को हुई एवं इसे अंतर्राष्ट्रीय मान्यता 25 दिसंबर को मिली। इसकी राजधानी येरेवन है।

वर्तमान आर्मेनिया

आर्मेनिया दस प्रांतों में बंटा हुआ है। प्रत्येक प्रांत का मुख्य कार्यपालक (मार्ज़पेट) आर्मेनिया सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है। इनमें येरवान कों राजधानी शहर होने से विशिष्ट दर्जा मिला है। येरवान का मुख्य कार्यपालक महापौर होता है जो राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है।

आर्मेनिय़ा का कुल क्षेत्रफल 29,400 वर्ग किलोमीटर है। जिसका 4.71 प्रतिशत जलीय क्षेत्र है। यहाँ की जनसंख्या 32,31,900 है एवं वर्ग किमी घनत्व 101 व्यक्ति है। इसकी सीमाएँ तुर्की, जॉर्जिया, अजरबैजान और ईरान से लगी हुई हैं। अर्मेनिया की राजधानी एवं सबसे बड़ा नगर येरेवान है। यहां की सर्वाधिक जनसंख्या इसाई धर्म का पालन करती है।
यहां की अधिकारिक भाषा आर्मीनियन है। यहां के वर्तमान राष्ट्रपति आर्मेन सार्गस्यान एवं प्रधानमंत्री निकोल फाशिन्यान है। आर्मेनिया 40 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का सदस्य है। इसमें संयुक्त राष्ट्र, यूरोप परिषद, एशियाई विकास बैंक, स्वतंत्र देशों का राष्ट्रकुल, विश्व व्यापार संगठन एवं गुट निरपेक्ष संगठन आदि प्रमुख हैं।

इतिहास

अर्मेनियाई मूल के लोग अपने को हयक का वंशज मानते हैं जो नूह (इस्लाम ईसाईयत और यहूदियों में पूज्य) का पर-परपोता था। कुछ ईसाईयों की मान्यता है कि नोआ और उसका परिवार यहीं आकर बस गया था। आर्मीनिया का अर्मेनियाई भाषा में नाम हयस्तान है जिसका अर्थ हायक की जमीन है। हायक नोह के पर-परपोते का नाम था।

इस्लाम, ईसाई और यहूदी धर्म की उभय मान्यताओं के अनुसार पौराणिक महाप्रलय की बाढ़ से बचाने वाले नोआ (अरबी में नूह, हिन्दू में मत्स्यावतार) का नाव यरावन की पहाड़ियों के पास आकर रुक गया था। लौह काल में अरामे के उरातु साम्राज्य ने सभी शक्तियों को एक किया और उसी के नाम पर इस क्षेत्र का नाम अर्मेनिया पड़ा।

इतिहास के पन्नों पर आर्मीनिया का आकार कई बार बदला है। 80 ई.पू. में आर्मेनिया राजशाही के अंतर्गत वर्तमान तुर्की का कुछ भू-भाग, सीरिया, लेबनान, ईरान, इराक, अज़रबैजान और वर्तमान आर्मीनिया के भू-भाग सम्मिलित थे। रोमन काल में अर्मेनिया फ़ारस और रोम के बीच बंटा रहा। ईसाई धर्म का प्रचार यूरोप और ख़ुद अर्मेनिया में इसी समय हुआ। सन 591 में बिज़ेन्टाईनों ने पारसियों को हरा दिया पर 645 में वे ख़ुद दक्षिण में शक्तिशाली हो रहे मुस्लिम अरबों से हार गए। इसके बाद यहाँ इस्लाम के भी प्रचार हुआ। ईरान के सफ़वी वंश के समय (1501—1730) यह चार बार इस्तांबुल के उस्मानी तुर्कों और इस्फ़हान के शिया सफ़वी शासकों के बीच हस्तांतरित होता रहा। 1920—1991 तक आर्मीनिया एक साम्यवादी देश था। यह सोवियत संघ का एक सदस्य था। आज आर्मीनिया की तुर्की और अज़रबैजान से लगती सीमा संघर्ष की वजह से बंद रहती हैं। नागोर्नो-काराबाख पर आधिपत्य को लेकर 1992 में आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच लड़ाई हुई थी जो 1994 तक चली थी। आज इस जमीन पर आर्मीनिया का अधिकार है लेकिन अजरबैजान अभी भी जमीन पर अपना अधिकार बताता है।

अर्मेनियाई मूल की लिपि आरामाईक एक समय (ईसा पूर्व 300) भारत से लेकर भूमध्य सागर के बीच प्रयुक्त होती थी। पूर्वी रोमन साम्राज्य और फ़ारस तथा अरब दोनों क्षेत्रों के बीच अवस्थित होने के कारण मध्य काल से यह विदेशी प्रभाव और युद्ध की भूमि रहा है जहाँ इस्लाम और ईसाइयत के कई आरंभिक युद्ध लड़े गए थे। आर्मेनिया प्राचीन ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर वाला देश है। आर्मेनिया के राजा ने चौथी शताब्दी में ही ईसाई धर्म ग्रहण कर लिया था। इस प्रकार आर्मेनिया राज्य ईसाई धर्म ग्रहण करने वाला प्रथम राज्य है। देश में आर्मेनियाई एपोस्टलिक चर्च सबसे बड़ा धर्म है। इसके अलावा यहाँ ईसाईयों, मुसलमानों और अन्य संप्रदायों का छोटा समुदाय है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *