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लोकसभा में पास हुए दो कृषि विधेयक, किसान कर रहें है इसका विरोध जानें पूरी खबर

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भारत में कृषि क्षेत्र में सुधारों के लिए दो अहम विधेयकों को लोकसभा ने गुरुवार को मंजूरी दे दी है।  विपक्षी दलों के विरोध के बीच कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 और मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा विधेयक 2020 संसद के निम्न सदन में ध्वनिमत से पारित हो गए हैं। बीजेपी के सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने विधेयक को किसान विरोधी बताया। विधेयक लोकसभा में पारित होने के पहले अकाली दल कोटे से केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस्तीफा मंजूर भी कर लिया है।

ये  विधेयक कोरोना काल में मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश 2020 और मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश 2020 की जगह लेंगे।  चालू मानसून सत्र के पहले ही दिन 14 सितंबर को केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने ये दोनों विधेयक लोकसभा में पेश किए थे जिन पर चर्चा के बाद लोकसभा ने अपनी मुहर लगा दी।

कृषि विधेयक:

*कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020

*मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा विधेयक 2020

*आवश्यक वस्तु संशोधन बिल

कृषि विधेयक की मुख्य बातें:

किसान मनचाही जगह पर फसल बेच सकते हैं।  बिना किसी रुकावट दूसरे राज्यों में भी कारोबार कर सकते हैं।  एपीएमसी के दायरे से बाहर भी खरीद-बिक्री संभव है। ऑनलाइन बिक्री इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग से होगी, जिससे मार्केटिंग लागत बचेगी और बेहतर दाम मिलेंगे।  फसल की बिक्री पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।

राष्ट्रीय स्तर पर कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग की व्यवस्था बनेगी।  रिस्क किसानों का नहीं, एग्रीमेंट करने वालों पर होगा।  किसान कंपनियों को अपनी कीमत पर फसल बेचेंगे।  किसानों की आय बढ़ेगी, बिचौलिया राज खत्म होगा।  तय समय सीमा में विवाद निपटारे की व्यवस्था होगी।

अनाज, दलहन, खाद्य तेल, आलू-प्याज आवश्यक वस्तु नहीं होंगे।  उत्पादन, स्टोरेज, डिस्ट्रीब्यूशन पर सरकारी नियंत्रण खत्म होगा।  फूड सप्लाई चेन के आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी।  उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी।  सब्जियों की कीमतें दोगुनी होने पर स्टॉक लिमिट लागू होगी।

खेती में निजी निवेश होने से  विकास तीव्रगति से हो सकेगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, कृषि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होने से देश की आर्थिक स्थिति और अच्छी होगी।

किसान क्यों विरोध कर रहे हैं:

कृषि से जुड़े विधेयकों का पंजाब में काफी विरोध हो रहा है क्योंकि किसान और व्यापारियों को इससे एपीएमसी मंडियां खत्म होने की आशंका है। यही कारण है कि प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों ने कृषि विधेयकों का विरोध किया है।

कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 में कहा गया है कि किसान अब एपीएमसी मंडियों के बाहर किसी को भी अपनी उपज बेच सकता है, जिस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, जबकि एपीएमसी मंडियों में कृषि उत्पादों की खरीद पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग मंडी शुल्क व अन्य उपकर हैं। पंजाब में यह शुल्क करीब 4.5 फीसदी है।  वहीं, पंजाब और हरियाणा में एमएसपी पर गेहूं और धान की सरकारी खरीद की जाती है। किसानों को डर है नए कानून के बाद एमएसपी पर खरीद नहीं होगी क्योंकि विधेयक में इस संबंध में कोई व्याख्या नहीं है कि मंडी के बाहर जो खरीद होगी वह एमएसपी से नीचे के भाव पर नहीं होगी।

नोट:

*हरित क्रांति कृषि उत्पादन से संबंधित है।
*वर्तमान कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर है।
*हरसिमरत कौर बादल खाद्य प्रसंस्करण मंत्री थी।

 

 

 

 

 

 

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