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स्वामी अग्निवेश का निधन, जानें आर्य समाज का योगदान एवं सिद्धांत

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आर्य समाज के जाने-माने नेता और प्रख्यात समाजसेवी स्वामी अग्निवेश का शुक्रवार को दिल्ली में 80 साल की अवस्था में निधन हो गया। 11 सितंबर 2020 को उनके निधन पर राजनीति, समाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
21 सितंबर 1939 को स्वामी अग्निवेश का जन्म जांजगीर-चाँपा जिले के सक्ती छत्तीसगढ़ में हुआ था। स्वामी अग्निवेश ने कोलकाता से कानून और बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी।

राजनीतिक सफर:
स्वामी अग्निवेश सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए जाने जाते थे। 1970 में आर्य सभा नाम की राजनीतिक पार्टी बनाई थी। 1977 में वह हरियाणा विधानसभा में विधायक चुने गए और हरियाणा सरकार में शिक्षा मंत्री भी रहे। 1981 में उन्होंने बंधुआ मुक्ति मोर्चा नाम के संगठन की स्थापना की।

विवादों से पुराना नाता:
स्वामी अग्निवेश हमेशा अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहे। साल 2011 में अमरनाथ में हिम शिवलिंग को लेकर उनके बयान से काफी बवाल हुआ था। स्वामी अग्निवेश ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से हर साल बनने वाला शिवलिंग महज एक बर्फ का पुतला है।
उन्होंने कहा था कि इसे हिंदू साधु-संत भगवान बताते हैं और अपनी दुकानदारी चमकाते हैं। उन्होंने कहा कि अमरनाथ गुफा में बर्फ जमने को भूगोल की भाषा में ‘स्टेलेक्टाइट’ कहते हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें जमकर फटकार लगाई। 8 नवंबर 2011 को स्वामी अग्निवेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन जज एच.एल. दत्तू और सी.के. प्रसाद की बेंच ने कहा कि उन्हें बोलने से पहले अपने शब्दों को तोलना चाहिए। उनके इस बयान को लेकर देश के कई हिस्सों में FIR दर्ज हुई थी।
बिग बॉस एवं अन्ना आंदोलन:
स्वामी अग्निवेश ने रियलिटी शो बिग बॉस में भी हिस्सा लिया था। इसके अलावा वे अन्ना हजारे के आंदोलन से भी जुड़े और फिर मतभेद होने पर अलग हो गए।

 

आर्य समाज:
महर्षि दयानन्द सरस्वती ने 12 अप्रैल, 1875 को मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की थी। आर्य समाज के मंच से स्वामी दयानंद सरस्वती ने देश में फैली कुरीतियों और धर्म के नाम पर पाखंडों को जड़ से उखाड़ फेंकने के साथ-साथ गुलामी की बेड़ियों से जकड़ी मातृभूमि को विदेशियों से मुक्त कराने का आह्वान किया। आर्य समाज वैदिक धर्म पर आधारित वह संगठन है, जो धर्म, अधर्म की व्याख्या तर्क की तुला पर तौलकर करता है।
आर्यसमाज के कार्य:
अंतरजातीय विवाहों को लेकर आर्य समाज की विशिष्ट पहचान से आज सब अवगत हैं। आर्य समाज में जाति बंधन से मुक्त विवाह को आज कानूनी रूप मिला हुआ है। जिसके लिए आर्य समाज का विवाह प्रमाण पत्र बालिगों के लिए संजीवनी सिद्ध हो रहा है। स्त्रियों को शिक्षा का अधिकार दिलाने वाले आर्य समाज ने विधवा विवाह पर सरकार को कानून बनाने पर मजबूर कर दिया।

आर्य समाज के प्रमुख सिद्धांत :
*सभी शक्ति और ज्ञान का प्रारंभिक कारण ईश्वर ही है।
*ईश्वर ही सर्व सत्य है, सर्व व्याप्त है, पवित्र है, सर्वज्ञ है, सर्वशक्तिमान है और सृष्ट‍ि का कारण है।

*सिर्फ ईश्वर की ही पूजा होनी चाहिए।
* वेद ही सच्चे ज्ञानग्रंथ हैं।
* सत्य को ग्रहण करने और असत्य को त्यागने के लिए सदा तत्पर रहना चाहिए।
*उचित- अनुचित का विचार करने के बाद ही कोई कार्य करना चाहिए।
* मनुष्य मात्र को शारीरिक, सामाजिक और आत्मिक उन्नति के लिए कार्य करना चाहिए।
*प्रत्येक जीव के प्रति न्याय, प्रेम का व्यवहार करना चाहिए।
*ज्ञान की ज्योति फैलाकर अंधकार को दूर करने का प्रयास हमेशा करना चाहिए।
* केवल अपनी उन्नति से संतुष्ट न होकर दूसरों की उन्नति के लिए भी प्रयास करना चाहिए।
*समाज के कल्याण के लिए और उन्नति के लिए अपने मत तथा व्यक्तिगत बातों का त्याग करना चाहिए।

नोट :
*स्वामी अग्निवेश बंधुआ मुक्ति मोर्चा के संस्थापक थे।
*झारखंड में 2 साल पहले एक उग्र भीड़ ने उन पर हमला किया था
*आर्य समाज का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
*इस संगठन की अधिकारिक भाषा हिंदी है।
*आर्य समाज हिंदु धर्म से संबंधित है।
*आर्य समाज का अर्थ है— भद्रजनों का समाज होता है।

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