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पेट्रोलियम ईंधन, हाइड्रो या फिर थर्मल पावर के स्थान पर दुनिया का फोकस सौर ऊर्जा पर है। एक तरफ जहां सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार नई-नई योजनाएं ला रही हैं, वहीं वैज्ञानिक भी नए-नए प्रयोग कर रहे हैं।  केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (CMERI), दुर्गापुर ने अपनी आवासीय कालोनी में एक विशाल सौर वृक्ष लगाया है।  दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया का सबसे विशाल सौर वृक्ष है।

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिक अनुसंधान संस्थान (CMERI) ने मिलकर एक विशाल सौर वृक्ष (Solar Tree) तैयार किया है।  इस पेड़ को सीएसआईआर-सीएमईआरआई की दुर्गापुर स्थित आवासीय कॉलोनी तैयार किया गया है। मीडिया  रिपोर्टस के अनुसार,  इस सौर पेड़ की क्षमता 11.5 केडब्ल्यूपी यानी किलोवाट पीक  से अधिक है। यह पेड़ स्वच्छ और हरित ऊर्जा की 12,000-14,000 यूनिट हर साल तैयार कर सकता है।

क्‍या है सोलर ट्री? 

एक स्‍टील के पाइप पर सोलर पैनल पत्तियों की तरह लगाए गए हैं। सभी पैनल को वर्टिकल लगाया गया है। इस सोलर ट्री में दो घंटे का पावर बैकअप वाली बैटरी लगाई गई है, ताकि सूरज छिपने के बाद भी बिजली मिलती रहे।

सोलर ट्री की कीमत

एक सौर वृक्ष की कीमत 7.5 लाख रुपये के आसपास होती है।  इसे तैयार करने वाली कंपनियां किसानों को प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा और उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम) योजना के तहत वितरित कर सकती हैं।

खासियत

सौर वृक्ष 330 डब्ल्यूपी की क्षमता वाले 35 सौर पीवी पैनल लगाए गए हैं। सौर पीवी पैनलों को पकड़ने वाले हत्थे का झुकाव लचीला है और इसे जरूरत के मुताबिक सैट किया जा सकता है। यह सुविधा छत पर लगने वाले सौर पैनल में नहीं होती है. इससे ऊर्जा उत्पादन आंकड़ों की निगरानी वास्तविक समय या दैनिक आधार पर की जा सकती है।

एक सौर वृक्ष पेट्रोलियम ईंधन से ऊर्जा बनाने के दौरान पैदा होने वाली ग्रीन हाउस गैसों  की तुलना में 10-12 टन कार्बन डाई आक्साइड बचा सकता है।  इस सौर वृक्ष में आईओटी आधारित सुविधाएं जैसे- खेत की सीसीटीवी से निगरानी, ​नमी की मात्रा, हवा की गति, बारिश की भविष्यवाणी और मिट्टी की जांच के सेंसर की क्षमता है।

5 किलोवाट बिजली पैदा करने के लिए अभी देश में जो कन्‍वेंशनल सोलर प्‍लांट लग रहे हैं, उनके लिए 400 वर्ग फुट जमीन की जरूरत पड़ती है। सोलर पावर ट्री को सरकार ने मान्‍यता दे दी है और पिछले दिनों एक कार्यक्रम में सरकार की ओर से इसे ऑफिशियली लॉन्‍च भी कर दिया गया है। सौर वृक्षा का यह मॉडल खेती-किसानी के लिए बहुत काम का साबित हो सकता है।  इससे खेती के कई कामों में ऊर्जा की बचत होगी  सौर वृक्ष का इस्तेमाल पावर वाले सिंचाई पंप, ई-ट्रैक्टर और ई-पावर टिलर जैसी मशीनों को चलाने में किया जा सकता है।

एक नजर में

  • CSIR-CMERI के डायरेक्टर डॉक्टर हरीश हिरानी  है।
  • पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में इसे विकसित किया गया है।

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