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AK-203 Assault Rifle : Made in UP Rifle , जानें AK-203 रायफल के बारे में हर एक अपडेट

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भारत और रूस के बीच AK 203 रायफल की खरीद का समझौता हो गया है, ऐसे में चीन—पाक सेना, आतंकवादियों और नक्सलियों की नींद हराम होना लाजमी है। पिछले 70 वर्षों से एके 47 दुनिया का सबसे जाना पहचाना हथियार है। एके सीरीज़ की राइफलें चलाने में आसान हैं।  इसे तैयार और फायर करने में बहुत कम वक्त लगता है और सैंकड़ों मीटर दूर दुश्मन पर भी स्थित  इसकी गोलियां घातक हमला करती हैं।

विशेषताएं

एके-47 सबसे बेसिक मॉडल है इसके बाद एके में 74, 56, 100 सीरीज, 200 सीरीज आ चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नई असाल्ट राइफल की लंबाई करीब 3.25 फुट होगी।  गोलियों से भरी राइफल का वजन लगभग 4 किलोग्राम होगा।  साथ ही यह किसी भी ऑपरेशन में जवानों के लिए इजी टू हैंडल होगी। यह नाइट ऑपरेशन में भी काफी कारगर होगी । इसमें 66400 राइफल सेना, 4000 राइफल एयरफोर्स और 2000 राइफल नेवी के जवानों को मिलेगी।

फिलहाल भारत की तीनों सेनाओं के पास इंसास असॉल्ट रायफल है, जो कि आधुनिक नहीं है, इसलिए एके-203 राइफल इंसास को रिप्लेस करेगी, जिससे की भारतीय सेना किसी भी ऑपरेशन को आसानी से अंजाम दे सके। इसी के साथ ही रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी कंपनी से 7.69 एमएम 59 कैलिबर राइफल का ऑर्डर भी दिया है।

रूस की स्पेशल फोर्सेज अपने मिशन को सौ फीसदी सटीकता के साथ पूरा करने के लिए इसी हथियार पर भरोसा करती है और अब भारतीय सेना भी शत्रुओं के खिलाफ इसी रायफल का इस्तेमाल करेगी।

Make In India के तहत बनाई जाएंगी रायफलें

दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में AK सीरीज की रायफल इस्तेमाल की जाती है।  अब भारत और रूस मिलकर उत्तर प्रदेश के अमेठी में एके सीरीज़ की सबसे आधुनिक राइफल बनाएंगे. मेक इन इंडिया के तहत यहां साढ़े सात लाख राइफलें बनाई जाएंगी।

AK 47 और  AK 203 रायफल में अंतर

भारतीय सेना की एंटी टेरर फोर्स राष्ट्रीय राइफल्स के झंडे में भी एके 47 को जगह दी गई है।  नए भारत की भारतीय सेना में अब नए हथियार शामिल हो रहे हैं। पुरानी एके 47 से ज्यादा आधुनिक AK 203 (टू जीरो थ्री) रायफल अब सेना का मुख्य हथियार बनेगी, और इसे बनाने समय भारतीय सेना की हर जरूरत का ध्यान रखा गया है। एके 203 में 30 के बदले 60 गोलियों वाली मैगज़ीन लगाई जा सकती है। यानी ये पहले से ज्यादा देर तक दुश्मनों का मुकाबला करेगी। मौसम चाहे कितना भी खराब हो, बर्फबारी हो रही हो या धूल भरी आंधी हो एके 203 हर मौसम में काम करेगी।  एके 203 पुरानी गन के मुकाबले 30 प्रतिशत ज्यादा सटीक निशाना लगाती है।

अमेठी में राइफल फैक्ट्री की स्थापना

भारत और रूस ने अपने रक्षा उद्योगों  को बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की और एक बड़ी डील को अंतिम रूप दिया। इस डील के तहत उत्तर प्रदेश के अमेठी में एक AK-203 असॉल्ट राइफल फैक्ट्री की स्थापना की जाएगी। एके-203 राइफल को ऑटोमेटिक और सेमी ऑटोमेटिक दोनों ही मोड पर इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

एक नजर में

  • AK 203 पुरानी AK 47 का नया अवतार है।
  • AK 47 का पूरा नाम Automatic Kalashnikov(कलाश्निकोव) 47 है
  • इस राइफल का निर्माण वर्ष 1947 में शुरु हुआ था, और इसका नाम (मिखाइल कलाश्निकोव) के नाम पर पड़ा था, जिन्होंने इस रायफल को डिज़ाइन किया था।
  • रूस के साथ हुई डील के मुताबिक देश में 7 लाख 50 हज़ार रायफल बनाई जाएंगी।
  • उत्तर प्रदेश के अमेठी में इसी साल AK 203 का उत्पादन शुरू हो जाएगा।
  • हर मौसम में काम करना भी AK 203 की बड़ी खूबी है।
  • ये रायफल सियाचिन की माइनस 35 डिग्री की ठंड, थार रेगिस्तान की धूल भरी हवा और पूर्वोत्तर की  बारिश वाले मौसम में भी, बिना रूके काम करेगी।
  • AK 203 की गोलियां फायर करने की रफ्तार भी काफी तेज है।
  • ये रायफल 60 सेकेंड में 600 गोलियां दाग सकती है। यानी एक सेकेंड में 10 गोलियां।
  • एके-203 असॉल्ट रायफल की रेंज 800 मीटर है
  • एके-203 असॉल्ट रायफल की गोली की गति 715 किमी प्रति घंटा होती है
  • भारत  पहला देश है जिसके साथ मिलकर  AK 203 रायफल बनाई जाएगी।
  • भारत और रूस मिलकर उत्तर प्रदेश के अमेठी में एके सीरीज़ की सबसे आधुनिक राइफल बनाएंगे
  • Make In India के तहत यहां साढ़े सात लाख राइफलें बनाई जाएंगी।
  • AK 203 रायफल में Night Vision यानी रात में देखने में मदद करने वाले उपकरण भी लगाए जा सकते हैं।
  • कोरवा आयुध फैक्टरी में प्रतिष्ठित कलाशनिकोव राइफलों की नवीनतम श्रेणियां बनाई जाएंगी।

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