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वित्त वर्ष 2021 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ में उम्मीद से ज्यादा गिरावट आई है। पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट -23.9 फीसदी दर्ज की गई। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में यह अमेरिका के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे दयनीय स्थिति है। भारतीय अर्थव्यवस्था में बीते 40 साल में पहली बार इतनी बड़ी गिरावट आई है। कोरोना महामारी के चलते देशभर में 2 माह पूरा देश लॉकडाउन रहा, जिससे आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप ​हो गईं।

राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (NSO) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 5.2 फीसदी रही थी। अधिकांश रेटिंग एजेंसियों ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही की जीडीपी में गिरावट का अनुमान जताया था। सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए 25 मार्च से देशभर में लॉकडाउन का एलान किया था। केंद्र सरकार ने 20 अप्रैल के बाद कुछ निश्चित आर्थिक गतिविधियों में लॉकडाउन से ढील देने की शुरुआत की थी। वित्त वर्ष 2018-19 में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.1 फीसदी की दर से बढ़ी थी। जबकि 2019-20 में अर्थव्यवस्था की विकास दर 4.2 फीसदी रही थी।
जीडीपी आंकड़े इस तिमाही के:

NSO के आंकड़े के मुताबिक 2020-21 की पहली तिमाही  में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सकल मूल्यवर्धन – 39.3 फीसदी रहा। कंस्ट्रक्शन सेक्टर में यह -50.3 फीसदी रहा है। बिजली में यह -7 फीसदी है। उद्योग में  -38.1 फीसदी और सर्विस सेक्टर में -20.6 फीसदी रहा। केवल कृषि क्षेत्र में 3.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. खनन क्षेत्र में  -23.3 फीसदी, ट्रेड एवं होटल में -47 फीसदी, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में -10.3 फीसदी और फाइनेंस, रियल एस्टेट में -5.3 फीसदी रहा है.

पिछली तिमाहियों में GDP ग्रोथ, केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन के अनुसार
Q1FY21: (-)23-9%
Q4FY20: 3.1%
Q2FY20: 4.5%
Q3FY20: 4.7%
Q1FY20: 5%

 

वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में 2011-12 के कांस्टेंट प्राइस पर 26.90 लाख करोड़ रुपये रही। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 35.35 लाख करोड़ रुपये थी। इस तरह इसमें 23.9 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, करंट प्राइस पर जून 2020 तिमाही में जीडीपी 38.08 लाख करोड़ रुपये रही, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 49.18 लाख करोड़ रुपये थी। इस तरह 22.6 फीसदी की गिरावट आई है।

आने वाली तिमाहियों में बेहतर प्रदर्शन करेगा देश: मुख्य आर्थिक सलाहकार
मुख्य आर्थिक सलाहकार के. वी. सुब्रहमणियन का कहना है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था में 23.9 फीसदी की गिरावट का मुख्य कारण कोविड-19 संक्रमण रोकने के लिए लगाया गया कड़ा लॉकडाउन है। आने वाली तिमाहियों में देश बेहतर प्रदर्शन करेगा। कई क्षेत्रों में ‘वी’ आकार (ग्राफ चार्ट पर अंग्रेजी के वी अक्षर की भांति) का तेज सुधार देखा जा रहा है। सुब्रहमणियन ने कहा कि बिजली उपभोग और रेल मालवहन जैसे संकेत दिखा रहे हैं कि आर्थिक गतिविधियों में सुधार हो रहा है।

क्या है GDP, कैसे होती है गणना?
किसी भी एक साल के भीतर देश में उत्पादित होने वाले सभी सामानों और सेवाओं का कुल मूल्य सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी है। जीडीपी किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति को दर्शाता है। इससे पता चलता है कि देश का विकास किस तरह हो रहा है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय जीडीपी की गणना करता है। जीडीपी के आंकड़े हर तिमाही यानी साल में चार बार जारी किए जाते हैं।
जीडीपी गणना का आधार:
जीडीपी की गणना चार घटकों कंजम्पशन एक्सपेंडिचर, गवर्नमेंट एक्सपेंडिचर, इनवेस्टमेंट एक्सपेंडिचर और नेट एक्सपोर्ट्स के जरिए होती है। जीडीपी की गणना के लिए NSO देश के आठ प्रमुख क्षेत्रों से आंकड़े प्राप्त करता है. इनमें कृषि, रियल एस्टेट, मैन्युफैक्चरिंग, विद्युत, गैस सप्लाई, माइनिंग, वानिकी एवं मत्स्य, क्वैरीइंग, होटल, कंस्ट्रक्शन, ट्रेड और कम्युनिकेशन, फाइनेंसिंग और इंश्योरेंस, बिजनेस सर्विसेज और कम्युनिटी के अलावा सोशल व सार्वजनिक सेवाएं शामिल है। ध्यान देने वाली बात ये है कि ये उत्पादन या सेवाएं देश के भीतर ही होनी चाहिए।

विश्व के साथ तुलनात्मक आंकड़े:
अप्रैल जून तिमाही में जीडीपी में सबसे ज्यादा गिरावट भारत में दर्ज की गई है। भारत की जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर इंग्लैंड आता है। वहां की जीडीपी में अप्रैल-जून तिमाही में 20.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
फ्रांस का ग्रोथ रेट माइनस 13.8 फीसदी

इस मामले में तीसरा सबसे प्रभावित देश फ्रांस है। वहां जून तिमाही में ग्रोथ रेट में 13.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इटली में 12.4 फीसदी और कनाडा में 12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। शुरुआत में इटली में कोरोना अनकंट्रोल हो गया था, लेकिन बाद में उसने इसपर नियंत्रण कर लिया।

अप्रैल-जून तिमाही में जर्मनी की जीडीपी में 10.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। उसी तरह अमेरिका की जीडीपी में 9.5 फीसदी और जापान की जीडीपी में 7.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
एकमात्र चीन में पॉजिटिव ग्रोथ रेट

बड़ी और विकसित अर्थव्यवस्था/इकॉनमी में एकमात्र चीन ऐसा देश है जिसने अप्रैल-जून तिमाही में पॉजिटिव ग्रोथ रेट दर्ज किया है। जून तिमाही में उसका ग्रोथ रेट प्लस 3.2 फीसदी रहा है। दरअसल कोरोना की शुरुआत चीन से ही हुई थी। उसके बाद यह धीरे-धीरे दूसरे देशों में फैला। चीन ने करीब तीन महीने के लिए लॉकडाउन लागू कर इस वायरस पर नियंत्रण पा लिया, जिसके कारण अब हालात कंट्रोल में और सामान्य हैं। वहां आर्थिक गतिविधि तेजी से पटरी पर वापस लौटी है।

क्या होगा GDP गिरने से:
जीडीपी के कमजोर आंकड़ों के प्रभाव को विस्तार से बताते हुए विशेषज्ञ कहते हैं कि 2018-19 के प्रति व्यक्ति मासिक आय 10,534 रुपये के आधार पर, वार्षिक जीडीपी 5 पर्सेंट रहने का मतलब होगा कि प्रति व्यक्ति आय वित्त वर्ष 2020 में 526 रुपये बढ़ेगी।
अगर आसान भाषा में समझें तो कुछ इस तरह से कह सकते हैं कि जीडीपी 4 फीसदी की दर से बढ़ती है तो आमदनी में वृद्धि 421 रुपये होगी। इसका मतलब है कि विकास दर में 1 फीसदी की कमी से प्रति व्यक्ति औसत मासिक आमदनी 105 रुपये कम हो जाएगी।

दूसरे शब्दों में कहें तो यदि वार्षिक जीडीपी दर 5 से गिरकर 4 फीसदी होती है तो प्रति माह आमदनी 105 रुपये कम होगी। यानी एक व्यक्ति को सालाना 1260 रुपये कम मिलेंगे।

अर्थव्यवस्था में और अधिक असमानता/खाई पैदा होगी। अमीरों के मुकाबले गरीबों पर इसका अधिक असर होता है। गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या बढ़ सकती है। जीडीपी में गिरावट से रोजगार दर में भी कमी आएगी।.

भारत में कौन जारी करता है GDP के आंकड़ें:
सरकारी संस्था केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) ये आंकड़े जारी करती है।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी सीएसओ देशभर से उत्पादन और सेवाओं के आंकड़े जुटाता है इस प्रक्रिया में कई सूचकांक शामिल होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई हैं।

GDP को ऐसे समझे:

अगर वर्ष 2011 में देश में सिर्फ़ 100 रुपये की तीन वस्तुएं बनीं तो कुल जीडीपी हुई 300 रुपये, 2017 तक आते-आते इस वस्तु का उत्पादन दो रह गया लेकिन क़ीमत हो गई 150 रुपये तो नॉमिनल जीडीपी 300 रुपये हो गया। यहीं बेस ईयर का फॉर्मूला काम आता है। 2011 की कॉस्टेंट कीमत (100 रुपये) के हिसाब से वास्तविक जीडीपी हुई 200 रुपये। अब साफ़-साफ़ देखा जा सकता है कि जीडीपी में गिरावट आई है।

सीएसओ विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों से समन्वय स्थापित कर आंकड़े एकत्र करता है। थोक मूल्य सूचकांक यानी डब्ल्यूपीआई और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई की गणना के लिए मैन्युफैक्चरिंग, कृषि उत्पाद के आंकड़े उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय जुटाता है।
इसी तरह आईआईपी के आंकड़े वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाला विभाग जुटाता है। सीएसओ इन सभी आंकड़ों को इकट्ठा करता है फिर गणना कर जीडीपी के आंकड़े जारी करता है।
मुख्य तौर पर आठ औद्योगिक क्षेत्रों के आंकड़े जुटाए जाते हैं। ये हैं- कृषि, खनन, मैन्युफैक्चरिंग, बिजली, कंस्ट्रक्शन, व्यापार, रक्षा और अन्य सेवाएं।

मंदी कब माना जाता है:

यदि अगली तिमाही में भी जीडीपी वृद्धि दर नकारात्मक रहती है तो देश आधिकारिक तौर पर मंदी के चपेट में माना जाता है। अमूमन लगातार दो तिमाही में जीडीपी दर का नकारात्मक होना ही मंदी माना जाता है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान:
2005 के प्रस्ताव में राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान (National Statistical Organisation) के दो विंग, सीएसओ और एनएसएसओ को प्रस्तावित किया गया था, जबकि 2019 के आदेश में कहा गया है कि सांख्यिकी विंग, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) मंत्रालय का एक अभिन्न अंग होगा जिसका गठन सीएसओ और एनएसएसओ के विलय के द्वारा किया जाना है।
वर्तमान संरचना:
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के निम्नलिखित दो विंग हैं-
*सांख्यिकी से संबंधित
*कार्यक्रम कार्यान्वयन से संबंधित
वर्तमान में सांख्यिकी विंग, राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान (National Statistical Organisation) में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO), कंप्यूटर केंद्र और राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) शामिल हैं।
कार्यक्रम कार्यान्वयन विंग में तीन प्रभाग हैं-
*20 पॉइंट प्रोग्राम
*इन्फ्रास्ट्रक्चर मॉनीटरिंग एंड प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग
*सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना
उक्त दो विंग के अलावा सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के एक प्रस्ताव के माध्यम से बनाए गए राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) के साथ-साथ एक स्वायत्त संस्थान, भारतीय सांख्यिकी संस्थान भी है जिसे संसद के एक अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित किया गया है।
NSC के पास सांख्यिकीय मामलों में नीतियों, प्राथमिकताओं और मानकों को विकसित करने का शासनादेश भी है।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ):
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय देश में सांख्यिकीय क्रियाकलापों में समन्‍वय करता है और सांख्यिकीय मानक तैयार करता है। इसके प्रमुख महानिदेशक होते हैं, जिनके सहयोग के लिए पांच अपर महानिदेशक होते हैं। सीएसओ के निम्‍नलिखित प्रभाग हैं:

राष्‍ट्रीय लेखा प्रभाग (एनएडी) : यह प्रभाग राष्‍ट्रीय लेखे तैयार करने के लिए जिम्‍मेदार है, जिनमें सकल घरेलू उत्‍पाद, सरकारी और प्राइवेट अंतिम खपत व्‍यय, स्‍थायी पूंजी निर्माण और अन्‍य स्‍थूल-आर्थिक एकीकृत कार्य भी शामिल हैं। यह प्रभाग एक वार्षिक प्रकाशन तैयार करता है, जिसका नाम है – ‘राष्‍ट्रीय लेखा सांख्यिकी’, जिसमें ये सांख्यिकी दी जाती है। इस प्रभाग के अन्‍य महत्‍वपूर्ण क्रियाकलाप इस प्रकार हैं:

*वर्तमान और स्थिर कीमतों पर सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) का तिमाही अनुमान तैयार करना;

*स्‍थायी पूंजी के पूंजी स्‍टॉक और खपत का अनुमान तैयार करना;

*राज्‍य-वार सकल मूल्‍य संवर्धन का अनुमान तैयार करना और रेलवे, संचार, बैंकिंग तथा बीमा और केंद्र सरकारी प्रशासन के सुपरा क्षेत्रीय क्षेत्रों की सकल स्‍थायी पूंजी तैयार करना

*निवेश-प्रतिफल संव्‍यवहार तालिका (आईओटीटी) तैयार करना और राज्‍य घरेलू उत्‍पाद (एसडीपी) के तुलनात्‍मक अनुमान तैयार करना।

सामाजिक सांख्यिकी प्रभाग (एसएसडी) : 

इस प्रभाग को मिलेनियम डेवलपमेंट गोल, पर्यावरण संबंधी आर्थिक लेखाकरण, आधिकारिक/ अनुप्रयुक्‍त सांख्यिकी के संबंध में अनुसंधान, कार्यशाला/ संगोष्‍ठी/ सम्‍मेलन आयोजित करने के लिए सहायता अनुदान देना, सांख्यिकी बिलों के लिए राष्‍ट्रीय/अंतर्राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार, सामाजिक-धार्मिक वर्गों पर राष्‍ट्रीय डेटा बैंक (डीएनबी) तैयार करना, स्‍थानीय स्‍तरीय विकास के लिए बुनियादी सांख्यिकी प्रायोगिक योजना बनाना, समय उपयोग सर्वेक्षण तथा नियमित और तदर्थ सांख्यिकीय प्रकाशन जारी करना।

आर्थिक सांख्यिकी प्रभाग (ईएसडी) :

यह प्रभाग आर्थिक गणना और वार्षिक औद्योगिक सर्वेक्षण (एएसआई) करता है, अखिल भारतीय औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक (आईआईपी), ऊर्जा सांख्यिकी तथा बुनियादी ढांचा सांख्यिकी का संकलन करता है और राष्‍ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (एनआईसी) और राष्‍ट्रीय उत्‍पाद वर्गीकरण (एनपीसी) जैसे वर्गीकरण तैयार करता है।

प्रशिक्षण प्रभाग :

इस प्रभाग की मुख्‍य जिम्‍मेदारी जनशक्ति को सांख्यिकी के सिद्धांतों और अनुप्रयोगों का प्रशिक्षण देना है ताकि साक्ष्‍य आधारित नीति बनाने और योजना तैयार करने, उसकी मॉनीटरिंग करने और मूल्‍यांकन करने के लिए अपेक्ष‍ित डेटा संकलन मिलान, विश्‍लेषण और प्रसारण की उभरती हुई चुनौतियों का सामना किया जा सके। यह प्रभाग राष्‍ट्रीय सांख्यिकीय प्रणाली प्रशिक्षण अकादमी (एनएसएसटीए) की भी देखरेख करता है, जो भारत में आधिकारिक सांख्यिकी में मानव संसाधन विकास और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर, विशेषत: विकासशील और सार्क देशों के लिए भी एक प्रमुख संस्‍थान है।

समन्‍वय और प्रकाशन प्रभाग (सीएपी) :

यह प्रभाग सीएसओ और संबंधित मंत्रालयों तथा राज्‍य/संघ राज्‍य क्षेत्र की सरकारों के साथ सांख्यिकी मामलों, केंद्र और राज्‍य सांख्यिकीय संगठनों (सीओसीएसएसओ) की गोष्‍ठियों के आयोजन के कार्य को देखता है और प्रति वर्ष ‘सांख्यिकी दिवस’ मनाता है, रिजल्‍ट फ्रेमवर्क प्रलेख (आरएफडी), नागरिक/ग्राहक चार्टर तथा वार्षिक कार्य योजना, परिणाम बजट और मंत्रालय की वार्षिक योजना तैयार करता है। यह प्रभाग क्षमता विकास योजना और भारत सांख्यिकी सुदृढ़ीकरण परियोजना (आईएसएसपी) के कार्यान्‍वयन के लिए भी जिम्‍मेदार है। ये योजनाएं विश्‍व बैंक की सहायता से केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाएं हैं। यह प्रभाग सांख्यिकी संग्रहण अधिनियम, 2008 को लागू करने और एनएससी की सिफारिशों के कार्यान्‍वयन पर अनुवर्ती कार्रवाई के समन्‍वय के लिए एक नोडल प्रभाग है। भारतीय सांख्यिकीय संस्‍थान (आईएसआई) से संबंधित प्रशासनिक कार्य भी सीएपी प्रभाग देखता है।

नोट:
*सीएसओ का पूर्ण रूप केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन है।
*वर्ष 1946 में अमेरिका में सबसे बड़ी मंदी आई थी।

*इस तिमाही में भारत की जीडीपी को सर्वाधिक सहारा कृषि क्षेत्र से मिला है जहां 3.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
*सबसे ज्यादा कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में 50.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
*पिछले 9 तिमाही से भारत की जीडीपी लगातार गिर रहीं है।

*जीडीपी का पूरा रूप सकल घरेलू उत्पाद Gross Domestic product है।

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