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नई शिक्षा नीति—2020: 34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव, जानें क्या—क्या बदला

नरेन्द्र मोदी सरकार ने 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में बदलाव किया है। इस शिक्षा नीति को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। इसमें प्रथम बदलाव मंत्रालय के नाम को लेकर किया गया है। पहले जिसे मानव संशाधन विकास मंत्रालय कहा जाता था उसे अब “शिक्षा मंत्रालय” कहा जाएगा। इस मंत्रालय के वर्तमान मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक है। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह शिक्षा नीति मील का पत्थर साबित होगी, इस नीति को तैयार करने के लिए भारत के कोने—कोने से सलाह ली गई है, उनके सुझावों पर विचार करने के बाद इसे तैयार किया गया है। भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी नीति को तैयार करने में इतने बड़े स्तर पर राय ली गई हो।
मुख्य बदलाव
1. अब 5 वीं वर्ग/कक्षा/क्लास तक के छात्र/छात्राओं को उनकी मातृ भाषा या स्थानीय भाषा और राजभाषा में ही शिक्षा दी जाएगी।
2. अन्य विषय अंग्रेजी भी एक विषय के तौर पर पढ़ाई जाएगी।
3. वर्ग 6 से बच्चों को व्यावसायिक शिक्षा भी दी जाएगी।
4. वर्ग 9—12 तक परीक्षाएं सेमेस्टर के हिसाब से ली जाएगी।
5. अब सिर्फ 12वीं में बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।
6. स्कूली शिक्षा को 5 +3 +3 +4 फॉमूले के तहत पढ़ाया जाएगा।
7. कॉलेज की डिग्री 3 / 4 साल की होगी, ग्रेजुएशन के पहले साल पर सर्टिफिकेट, दूसरे साल पर डिप्लोमा एवं तीसरें साल पर डिग्री प्रदान की जाएगी। अर्थात एक साल या दो साल पढ़ाई करने के बाद भी विद्यार्थियों को फेल करने की बजाय उन्हें सर्टिफिकेट या डिप्लोमा प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
8. 3 साल की डिग्री उन छात्र/छात्राओं के लिए जिन्हें उच्च शिक्षा नही ग्रहण करनी है।

9. उच्च शिक्षा की चाहत रखने वाले युवाओं को 4 साल की डिग्री लेनी होगी। 4 साल की डिग्री लेने वाले युवा एम.ए./परास्नातक करने के लिए केवल एक वर्ष पढ़ाई करनी होगी।
10. नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद युवाओं को MPhil करने की आवश्यकता नहीं होगीं वे सीधे PHD कर सकेंगे।
11. क्षेत्रीय भाषाओं में ई.कोर्स आरंभ किए जाएंगे।
12. वर्चुअल लैब्स विकसित किए जाएंगे।
13. एक नेशनल एजुकेशनल साइंटिफिक फोरम आरंभ किया जाएगा।
14. मानव संसाधन विकास मंत्रालय को अब शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा।
रायशुमारी
शिक्षा नीति 2020 को तैयार करने से पहले 676 जिलों के ढाई लाख ग्राम पंचायतों के लोगों से सलाह ली गई थी।
छ़़ात्र/छात्रा बीच में कर सकेंगे दूसरे कोर्स
उच्च शिक्षा में वर्ष 2035 तक सकल नामांकन का अनुपात 50 फीसदी तक होने का अनुमान है। वर्ष 2018 में यह 26.3 फीसदी थी। इस शिक्षा नीति के अनुसार यदि कोई छात्र/छात्रा एक कोर्स के बीच में ही कोई दूसरा कोर्स करना चाहता है तो पहले कोर्स से सीमित समय के लिए अवकाश लेकर वह दूसरा कोर्स कर सकता है।

युवाओं को तोहफा

नई शिक्षा के नीति के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों में साढ़े तीन करोड़ नई सीटें बढ़ाई जाएंगी। अब देश के विश्वविद्यालयों में नामांकन के लिए केवल एक संयुक्त प्रवेश परीक्षा का आयोजन कराएं जाने की बात इसमें कही गई है।
अगले 15 वर्षों के भीतर कॉलेजों को विश्वविद्यालयों से संबद्ध करने वाली प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दी जाएगी। इस दौरान कालेज डिग्रियां प्रदान करने वाले स्वायत्त कालेजों के रूप में अपना विकास कर लेंगे।

सरकारी,निजी, डीम्ड संस्थानों के लिए नियम समान होंगे।
उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे के अनुसार, नई शिक्षा नीति में तकनीकी/टेक्नोलॉजी और आनलाइन शिक्षा पर अधिक जोर दिया गया है। अब देश में सरकारी निजी एवं डिम्ड विश्वविद्यालयों के लिए सभी नियम समान होंगे।
प्रधानमंत्री की राय
नई शिक्षा नीति 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सुगमता, समता/बराबरी, गुणवत्ता, किफायत और जवाबदेही पर आधारित बताया।

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री राय 

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह शिक्षा नीति मील का पत्थर साबित होगी, इस नीति को तैयार करने के लिए भारत के कोने—कोने से सलाह ली गई है, उनके सुझावों पर विचार करने के बाद इसे तैयार किया गया है।

नोट: नई शिक्षा नीति 2020 के लिए पूर्व मंत्रिमंडल सचिव टीएसआर सुब्रहमण्यम की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी जिसने वर्ष मई 2016 में ही अपनी ​रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थीं। इसरो के पूर्व अ​ध्यक्ष “के. कस्तुरीरंगन” की अध्यक्षता में गठित समिति ने भी पिछले वर्ष वर्तमान शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।

हरिद्वार संसदीय क्षेत्र से रमेश पोखरियाल निशंक सांसद है।

भारत में लगभग 45 हजार कॉलेज है।
इससे पहले वर्ष 1986 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने शिक्षा नीति लागू की थी।
HRD- Human Resource development
MPhil- Master in philosophy
PHD- Doctor in philosophy

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