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बिहार के एक शहर के “नवाब की बेटी” का अदाकारा बनना और फिल्मी दुनिया में छा जानें की दास्ता बयां करती “कुमकुम”। हिन्दुस्तान में फिल्मों को “समाज का आईना” कहा जाता है, समाज पर फिल्मों का काफी असर होता है, फिल्मों के मेल और फिमेल कलाकारों को देखकर बहुत सारे युवा उनके जैसा बनने की चाहत रखते है। इस आर्टिकल में प्रसिद्ध अदाकारा “कुमकुम” के बारें में जानेंगे।
अभिनेत्री कुमकुम का आज मुंबई में निधन हो गया। वे 86 वर्ष की थी। इन्होंने लगभग 115 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। कभी आर कभी पार, मेरे महबूब कयामत होगी, मधुबन में राधिका नाचे रे और “ये है मुंबई मेरी जान” जैसे मशहूर गीत कुमकुम पर ही फिल्माएं गए थे।

फिल्मी सफर
इनकी यादगार फिल्में मिस्टर एक्स इन बॉम्बे,  मदर इंडिया, कोहिनूर, आंखें, राजा और रंक, मिस्टर एंड मिसेज 55, ललकार, नया दौर, उजाला, आर—पार और सीआईडी है। इन्होंने 1963 में बनी पहली भोजपुरी फिल्म “गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ैबों” में अभिनय किया था।
कुमकुम को फिल्मों में लाने का श्रेय अभिनेता और निर्देशक गुरूदत्त को दिया जाता है। गुरूदत्त ने 1950​ में फिल्म आर—पार में बिना किसी भूमिका के कुमकुम पर गीत फिल्माया, बाद में कुमकुम ने गुरूदत्त की फिल्म प्यासा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
22 अप्रैल 1934 को हुसैनाबाद में इनका जन्म हुआ था। इनका असली नाम जेबुन्निसा था। इनके पिता “हुसैनाबाद के नवाब” थे अर्थात ये काफी सक्षम परिवार से आती है। कुमकुम बिहार के शुखपुरा जिले के हुसैनाबाद की थी। यह वर्तमान में झारखंड का हिस्सा है। इनके पति सज्जाद अकबर खान है। ये वर्ष 1954 से 1973 तक फिल्मों में सक्रिय रहीं।
मदर इंडिया फिल्म 1957 में आई थी।

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