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23 जुलाई, 2020 को चीन ने वेनचांग अंतरिक्ष यान प्रक्षेपण स्थल से अपना पहला सफल मार्स प्रोब लॉन्च किया। इस मार्स प्रोब का नाम तियानवेन-1 रखा गया है। पृथ्वी से 400 मिलियन किलोमीटर की दूरी तय करके मंगल तक पहुंचने के लिए इस प्रोब को सात महीने लगेंगे। इस प्रोब के तीन हिस्से हैं। वे ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर हैं। ऑर्बिटर मंगल ग्रह की कक्षा में रहेगा और वैज्ञानिक ऑपरेशन करेगा। यह रिले सिग्नल भेजेगा। रोवर में छह पहिए और चार सौर पैनल हैं। इसका वजन लगभग 200 किलोग्राम है। रोवर ग्रह पर तीन महीने तक काम करेगा।

तियानवेन-1 के ये हैं लक्ष्य

  • मंगल की भूवैज्ञानिक संरचना, वातावरण, पर्यावरण, मिट्टी और पानी की जांच करना। स्पेसक्राफ्ट को चीन के सबसे शक्तिशाली और सबसे बड़े लॉन्ग मार्च 5 रॉकेट द्वारा ले जाया गया था।
  • व्यापक अवलोकन के लिए लाल ग्रह की परिक्रमा करना।
  • मंगल ग्रह की धरती पर उतरने के लिए और लैंडिंग स्थल पर घूमने के लिए एक रोवर भेजना।

2011 में विफल हो गया था मिशन

चीन ने 2011 में मंगल के लिए यिंगहुओ-1 नामक एक खोजपूर्ण मिशन भेजने की कोशिश की। हालांकि, मिशन जल्द ही विफल हो गया और प्रोब खो गई। यह प्रोब एक रूसी अंतरिक्ष यान से भेजी गई थी।

भारत मंगल परिक्रमा भेजने वाला पहला एशियाई देश

अब तक अमेरिका, रूस, भारत और यूरोपीय संघ ने मिशनों को सफलतापूर्वक भेजा है। भारत मंगल परिक्रमा भेजने वाला पहला एशियाई देश था। इस मिशन को मिशन मंगलयान कहा जाता है।

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