दुश्मन देशों के टैंक होंगे तबाह,भारत की ध्रुवास्त्र मिसाइल का परीक्षण सफल
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दुनिया के हर देश का अपना एक झंडा होता है जो उसका प्रतिक होता है। भारत का राष्ट्रीय झंडा तिरंगा है। राष्ट्रीय ध्वज फहराने/लहराने का अर्थ होता है कि भारत में जनता का शासन है। यह देश की सारी जनता को एक साथ खड़ा करने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। तिरंगा को एकता का प्रतीक माना जाता है।
तिरंगा झंडा केवल एक झंडा है ऐसी बात नहीं है, यह भारत की आन—बान—शान है, हिन्दुस्तान का चरित्र और सम्मान है। भारत मां का हर एक बेटा इसके सम्मान के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए हमेशा तैयार रहता है।

तिरंगे से प्रेरणा
जब यह तिरंगा लहराता है तब हर भारतवासी का तन—मन खुशी से झूम उठता है। उसके अंर्तमन में भारत भूमि के प्रति समर्पण, त्याग और खुशी से भर जाता है। हिन्दुस्तान का यह प्रतीक ​ही है जिसको देखकर/एहसास कर हर सैनिक दुश्मनों को तबाह कर देता है, पुलिस समाज के गद्दारों को जेल की हवा खिला देती है, युवा देशभक्ति की कसमें खाता है और इसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है। हर भारतवासी का तिरंगे को देखते ही गर्व की अनुभूति होने लगती है। भारत की आजादी से आज तक तिरंगा झंडा भारत का प्रतीक बना हुआ है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज 21 वीं सदी में भारत की तरक्की/सम्मान का पर्याय है।
प्रथम राष्ट्रीय ध्वज
7 अगस्त 1906 कोपारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कोलकाता में फहराया गया था। इसे लाल, पीले और हरे रंग की पट्टियों से बनाया गया था।
द्वितीय राष्ट्रीय ध्वज
1907में इस ध्वज को बनाया गया था,पेरिस में मैडम भीकाजी कामा और उनके साथ निर्वासित क्रांतिकारियों ने फहराया था। यह ध्वज पहले जैसा ही था इसमें सिर्फ ऊपरी हिस्से में एक कमल ओर सात तारे बनाएं गए थे सात तारे सप्तऋिषी का प्रतीक है और बीच की पट्टी में वन्दे मातरम् लिखा था।
तृतीय राष्ट्रीय ध्वज
वर्ष 1917 में यह ध्वज आया था, लोकमान्य तिलक और ऐनी बेसेंट ने होमरूल लिग आंदोलन के दौरान इसे फहराया गया था। इसमें 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियां थीजो एक —एक के अंतराल पर थी। इसमें सप्तऋिषी को समर्पित सात तारें थे।
चतुर्थ राष्ट्रीय ध्वज
इस ध्वज का प्रयोग वर्ष 1921 में बेजवाड़ा आज का विजयवाड़ा में किया गया था। यह ध्वज हिन्दु और मुस्लिम समुदाय के लिए समरसता बढाने वाला था। यह लाल और हरा रंग का था।
पंचम राष्ट्रीय ध्वज
यह ध्वज 1931 में अपनाया गया था, यह आज के तिरंगे के ही समान था इसमें केवल एक ही अंतर था। आज जिस स्थान पर चक्र है वहां चरखा हुआ करता था।
भारत की आजादी  15 अगस्त 1947 के बाद 22 जुलाई 1947 को भारत का राष्ट्रीय ध्वज  संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था।
झंडे में प्रयुक्त रंगों का मतलब/अर्थ
भारत का राष्ट्रीय ध्वज तीन रंगों से मिलकर बना है। सबसे ऊपर केसरिया/भगवा रंग है जो साहस एवं बलिदान का प्रतीक हैं। मध्य में सफेद रंग है जो शांति का प्रतीक है। सबसे नीचे हरा रंग है जो हरियाली,विकास, शुभ और उर्वरता का प्रतीक है। झंडे के केन्द्र में चक्र है​ जो अनवरत/लगातार गतिमान रहने, का प्रतीक है। इसमें 24 तीलिया होती है। इसका व्यास सफेद पट्टी की चौड़ाई के लगभग बराकर है। यह चक्र मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनवाएं गए अशोक चक्र से लिया गया है जो सारनाथ, उत्तर प्रदेश में स्थित है।
26जनवरी 2002 को भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन किया गया था। भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन के बाद भारत के नागरिक अपने मकानों, कार्यालयों पर तिरंगा फहरा सकते है। जनता तिरंगा को कभी भी फहरा सकती है, लेकिन फहराते समय इस बात ख्याल रखना होगा कि इसके सम्मान में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। ध्वज संहिता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
ऐसा करना सख्त मना है
तिरंगा को सांप्रदायिक लाभ के लिए, वाहनों पर कही भी,रेल, नाव या हवाई जहाज पर लपेटना सख्त मना है। किसी भी अन्य ध्वज को तिरंगे से ऊंचे स्थान पर नहीें लगाना चाहिए। तिरंगा को जानबूझकर फर्श पर/पानी पर लगाना सख्त मनाना है।

नोट:

22 जुलाई 1947 को आज ही के दिन भारत की संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रीय प्रतीक तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अंगीकार किया गया।
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के लंबाई—चौडाई का अनुपात 3:2 होता है।
वर्तमान राष्ट्रीय झंडा तिरंगा का डिजाइन/प्रारूप पिग्लै वैंकेया द्वारा तैयार किया गया था।

26 जनवरी और 15 अगस्त को प्रतिवर्ष तिरंगा को पूरे देश में फहराया जाता है। 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली थी। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान बनकर तैयार हुआ था।

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