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भारत—चीन सीमा विवाद और पाकिस्तान से तनातनीं के बीच भारत ने “ध्रुवास्त्र”  मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। इस एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम को हेलिकॉप्टर से दागा जा सकता है। इसे पहले नाग मिसाइल ( हेलिना) के नाम से जाना जाता था।
वर्तमान भारत सरकार मेक इन इंडिया मुहिम के तहत सेना को मजबूत बनाने की तैयारी में है। मेक इन इंडिया और सेना के साजों—सामान को ध्यान में रखते हुए इस स्वदेशी मिसाइल का परीक्षण किया गया।

परीक्षण स्थल
इस मिसाइल का परीक्षण आईटीआर बालासोर, उड़ीसा से ​15—16 जुलाई को किया गया था, चूंकि इसका परीक्षण हेलिकॉप्टर से नहीं किया गया था। एनआई के अनुसार 22 जुलाई/आज हेलिकॉप्टर से परीक्षण किया गया। जिसके बाद इसका वीडियों आज मीडिया के साथ साझा किया गया।
खासियत

जानकारी के अनुसार इस स्वदेशी मिसाइल का इस्तेमाल भारतीय सेना के ध्रुव हेलिकॉप्टर से किया जाएगा। इस मिसाइल की मारक क्षमता 4 किलोमीटर तक है। यह मिसाइल कुछ सेकेंड में दुश्मन देशों के टैंकों को तबाह/मटियामेट कर सकती है।
ध्रुव हेलिकॉप्टर
हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के अनुसार, ध्रुव स्वदेश निर्मित एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर है। यह दो इंजन वाला मल्टी रोल, 5.5 टन वजनी श्रेणी का नया हेलिकॉप्टर है। इस सैन्य सेवा और सिविल आपरेशन के लिए प्रमाणित करने वाली एजेंसियों(सीईएमएलआईसी और डीजीसीए) ने मान्यता दी है। वर्ष 2017 तक228 हेलिकॉप्टर का उत्पादन हो चुका है जिसमें से 216 सैन्य सेवा में लगी हुई है। इसमें टरेट गन, रॉकेट, हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल, हेल्मेट प्वाइंटिंग सिस्टम, डाटा लिंक, इन्फ्रा रेड जैमर, आब्सटेकल एवायडेंस स्स्टिम और अब ध्रुवास्त्र से लैंस किया जा सकता है। इसका निर्माण हिन्दुस्तान एयरोनॉटिकस लिमिटेड द्वारा किया गया है। पायलटों के ट्रेनिंग और वीआईपी व्यक्तियों की यात्रा में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।
इसकी लंबाई 15.9 मीटर, चौड़ाई 13.2 मीटर और ऊंचाई 4.98 मीटर होती है।

इस उपलब्धि को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और सेना के लिए बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। इससे सेना को मिसाइल सिस्टम के लिए दूसरें देशों पर निर्भरता में कमी आएगी।

नोट:
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की वेबसाइट के अनुसार ध्रुवास्त्र तीसरी पीढ़ी की टैंक नाशक मिसाइल सिस्टम है। इसे आधुनिक हल्के हेलिकॉप्टर पर तैनात किया जा सकता है।
डीआरडीओ का मुख्यालय चांदीपुर, बालासोर, उड़ीसा में स्थित है। यह रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत ​कार्य करता है।

नाग मिसाइल सिस्टम को “दागों ओर भूल जाओं” भी कहा जाता है।

ITR– Integrated Test Range

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