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श्रृष्ठि के निर्माता ब्रह्मा जी का एकमात्र बड़ा मंदिर ; पूरी जानकारी

जिस प्रकार प्रयाग को ” तीर्थो का राजा” कहा जाता है, उसी प्रकार पुष्कर को तीर्थो का मुख या ”पुष्कराज” कहा जाता है।

ब्रह्मा जी के इस मंदिर में दाहिनी ओर देवी सावित्री और बाई ओर माता गायत्री का मंदिर है। पुष्कर यही एकमात्र ऐसी जगह है जहां ब्रह्मा जी का मंदिर है। ब्रह्मा जी के मंदिर के अलावे यहां देवी सावित्री, बदरीनारायण, वराह, और भगवान शिव के मंदिर है, लेकिन ये आधुनिक है। यहां के अनेक मंदिरों को औरंगजेब ने नष्ट कर दिया था।
सब तीर्थो का गुरू माना जाता है। यहां पवित्र सरोवर है, जो ब्रह्मा जी के मंदिर के समीप है। ग्रंथों में भगवान विश्वकर्मा को इनका ज्येष्ठ पुत्र बताया जाता है।

हिन्दुओं के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पुष्कर की दूरी अजमेर से मात्र 11 किलोमीटर है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन (अक्टूबर—नवंबर माह में) यहां भव्य मेलें का अयोजन किया जाता है। यह अरावली की पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इस समय बड़ी संख्या में देशी—विदेशी श्रद्धालु आते है।

इसके मूल निर्माता का नाम अभी तक ज्ञात नहीं है। इसका जिर्णोद्धार आदिगुरू शंकराचार्य ने कराया था।
पुष्कर में पाण्डवों के अज्ञातवास के समय बनवाएं गए 5 कुण्ड भी है, जो नाग पहाड़ पर स्थित है।
पुष्कर का उल्लेख पद्मपुराण एवं रामायण में भी मिलता है। पुष्कर को मंदिरों के शहर के रूप में भी जाना जाता है। कार्तिक माह में यहां पशुमेला भी आयोजित किया जाता है जिसे ऊंट मेला भी कहा जाता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा ऊंट मेला है।
श्राप के कारण ब्रह्मा जी की पूजा—अर्चना नहीं होती/मंदिर नहीं है। विश्व का यह एकमात्र मंदिर ब्रह्मा जी का मंदिर है।

ऐसी मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने ही इस श्रृष्ठि की रचना की है, सब इनकी ही संतान है।

 

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