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आज मध्यप्रदेश के रीवा में एशिया की सबसे बड़ी सौर परियोजना का उद्घाटन वीडियों कांफ्रेसिंग के जरिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की। प्रधानमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा आज से लेकर जब तक सूर्य है तब तक ऊर्जा का स्त्रोत सौर ऊर्जा बनी रहेंगी। 21वीं सदी में सौर ऊर्जा ऊर्जा का सबसे बड़ा श्रोत होगा क्योंकि यह सुनिश्चित, शुद्ध और सुरक्षित है। रीवा अब मां नर्मदा और श्वेत बाघ की तरह एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना के नाम से भी जाना जाएगा।
इस परियोजना से मध्यप्रदेश की जनता और उद्योगों को बिजली मिलेगी, यहां तक कि दिल्ली मेट्रो को भी इससे लाभ होगा। रीवा की तरह शाहजहांपुर, नीमच और छतरपुर में भी बड़े सौर ऊर्जा संयत्रों पर काम चल रहा है। भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं और भारत के विकास के लिए ऊर्जा और बिजली की जरूरतों के लिए स्वंय पर निर्भर होना, आत्मनिर्भर भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अक्षय ऊर्जा के बड़ी परियोजनाओं की शुरूआत कर हम यह भी शुरूआत कर रहे है कि जीवन के हर क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के ​प्रति हम प्रतिबद्ध हैं। इसका लाभ देश के कोने—कोने में, समाज के हर वर्ग तक, और प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कई केन्द्रीय मंत्री उपस्थित थे।
इस सोलर पार्क का विकास रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड ने किया है। यह परियोजना 500 हेक्टेयर में फैला हुआ है।

सौर ऊर्जा
सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया सौर ऊर्जा कहलाती है। इसमें प्रकाश किरणों का सीधे तौर पर उपयोग होता है। आसान शब्दों में, जब सूर्य का प्रकाश सोलर प्लेट पर पड़ता है तब सोलर प्लेट उसे विद्युत ऊर्जा में बदलता है ​इसे संचित भी किया जा सकता है।

सोलर पैनल का आविष्कारक
आधुनिक सोलर पैनल का डिजाइन रसेल ओह्ल ने किया जिसका पेटेंट 1941 में कराया गया। 1954 में इसका उपयोग पहली बार व्यापारिक उद्देश्य से बेल लैब्स द्वारा किया गया।

सौर ऊर्जा को अक्षय ऊर्जा कहा जाता है क्योंकि इसका क्षय नहीं होता है।

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