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ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के एक बयान के अनुसार ईरान ने 22 अप्रैल, 2020 को अपने पहले सैन्य उपग्रह (मिल्ट्री सैटेलाइट) को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक छोड़ा है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ ईरान के तनाव के बीच यह उपग्रह छोड़ा गया है। ईरान के सरकारी टीवी ने यह घोषणा की है कि ईरान का पहला सैन्य उपग्रह, जिसका नाम ‘नूर’ है, उसे केंद्रीय रेगिस्तान से 22 अप्रैल को सुबह छोड़ा गया था। इस बयान के अनुसार यह प्रक्षेपण सफल रहा है और उपग्रह अपनी कक्षा में पहुंच गया है।

जानें इससे जुड़ीं खास बातें

  • ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अपनी वेबसाइट पर एक बयान में इस बात की पुष्टि की है कि ‘नूर’ उपग्रह अपनी कक्षा में पहुंच गया है और यह पृथ्वी की सतह से 425 किमी ऊपर से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है।
  • ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने यह भी कहा है कि उसने नूर को छोड़ने के लिए क़ासिद या “मैसेंजर” उपग्रह वाहक का उपयोग किया था। हालांकि, उन्होंने इस तकनीक के बारे में कोई खुलासा नहीं किया है।
  • उन्होंने जो एकमात्र खुलासा किया है उसके मुताबिक, तीन-चरण वाले क़ासिद उपग्रह वाहक में ठोस और तरल ईंधन के संयोजन का उपयोग किया गया था।
  • ईरान के सरकारी टीवी ने दिखाया कि क़ासिद उपग्रह वाहक पर पवित्र कुरान से एक आयत अंकित थी, जिसे अक्सर यात्रा करते समय मुसलमान पढ़ते हैं। इस आयत का अर्थ है, “महिमा उसी (ईश्वर) की, जिसने हमें यह प्रदान किया है, क्योंकि हम इसे अपने प्रयासों से कभी नहीं बना सकते थे।”

क्या अमेरिका की आशंका सच हो गई :

संयुक्त राज्य अमेरिका ने लंबे समय से आशंका जताई है कि उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लंबी दूरी की बैलिस्टिक तकनीक का उपयोग परमाणु हथियारों के प्रक्षेपण के लिए भी किया जा सकता है। हालांकि, ईरान ने ऐसे सभी अमरीकी दावों से इनकार किया है कि इस तरह की गतिविधियां उस (ईरान) के द्वारा बैलिस्टिक मिसाइल का विकास करने के लिए एक कवर (आड़) हैं। ईरान ने परमाणु हथियार विकसित करने से भी हमेशा इनकार किया है।

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