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अंतरराष्ट्रीय संस्था रिपोर्टर्स विदऑउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) द्वारा 20 अप्रैल 2020 को विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक-2020 रिपोर्ट जारी की गई। रिपोर्ट के मुताबिक भारत वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 2 पायदान खिसक गया है। रैंकिंग में भारत 180 देशों में से 142वें स्थान पर है। भारत पिछले साल 140वें स्थान पर था। ‘द वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2020’ के मुताबिक भारत में 2019 में किसी भी पत्रकार की हत्या नहीं हुई और इस तरह देश के मीडिया के लिए सुरक्षा स्थिति में सुधार नजर आया। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में छह पत्रकारों की हत्या कर दी गई थी। इसमें पुलिस की हिंसा, माओवादियों के हमले, अपराधी समूहों या राजनीतिज्ञों का प्रतिशोध शामिल था। बता दें कि रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संस्था है, जो प्रेस की स्वतंत्रता के लिए कार्य करती है। यह संस्था मीडिया पर विश्व भर में होने वाले हमलों पर नजर रखती है।

वैश्विक संदर्भ में रिपोर्ट की खास बातें

  • इस सूची में लगातार चौथी बार नॉर्वे पहले स्थान पर है और नॉर्थ कोरिया सबसे निचले स्थान पर है। दूसरे स्थान पर फिनलैंड, तीसरे स्थान पर डेनमार्क, 11वें स्थान पर जर्मनी, 34वें स्थान पर फ्रांस, 35वें स्थान पर यूके, 45वें स्थान पर अमेरिका, 66वें स्थान पर जापान और 107वें स्थान पर ब्राजील है।
  • दक्षिण एशिया में सामान्य तौर पर सूचकांक में खराब प्रदर्शन नजर आया। इसमें पाकिस्तान तीन स्थान गिरकर 145 और बांग्लादेश एक स्थान गिरकर 151 पर आ गया है। चीन 177वें स्थान पर उत्तर कोरिया से महज तीन स्थान ऊपर है। अर्थात 180वें स्थान पर उत्तर कोरिया है।

भारत के संदर्भ में रिपोर्ट की खास बातें

  • विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत साल 2017 में 136वें स्थान पर और साल 2018 में 138वें स्थान पर था और साल 2019 में दो अंक कम होकर 140 पर पहुंच गया था। इस सर्वेक्षण में कुल 180 देशों को शामिल किया गया था। भारत इस साल 180 देशों के समूह में दो स्थान नीचे उतरकर 142वें नंबर पर आया है।
  • कश्मीर की स्थिति ने इस साल की रिपोर्ट को बहुत हद तक प्रभावित किया है। जम्मू-कश्मीर से 5 अगस्त 2019 को आर्टिकिल 370 हटाए जाने के बाद वहां की स्थिति तनावपूर्ण बानी हुई है।
  • जम्मू-कश्मीर में अपनी कार्रवाई से पहले सरकार ने राज्य में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की। इंटरनेट और फोन बंद कर दिए और मनमाने ढंग से हजारों कश्मीरियों को हिरासत में ले लिया, जिनमें राजनीतिक नेता, कार्यकर्ता, पत्रकार, वकील और बच्चों सहित संभावित प्रदर्शनकारी शामिल थे।

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