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April 17, 2020
17 April 2020 Current Affairs
April 17, 2020

17 अप्रैल, 2020 को भारतीय रिजर्व बैंक ने 3 मई, 3030 तक लॉकडाउन को बढ़ाए जाने के बाद उपायों की की घोषणा की है। आरबीआई ने रिवर्स रेपो दर को 3.75% तक घटा दिया है। जबकि, रेपो रेट को 5.15% से 4.4% कर दिया गया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशन (LTRO) के लिए 50,000 करोड़ रुपये की घोषणा की है।

ध्यान देने वाली बातें

भारतीय रिजर्व बैंक ने तरलता कवरेज अनुपात (LCR) को 100% से 80% तक कम कर दिया है। एलसीआर बैंकों द्वारा धारित परिसंपत्तियां हैं, जो यह सुनिश्चित करती हैं कि यह अल्पकालिक दायित्वों को पूरा करने सक्षम है। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक SIDBI, NABARD, NHB जैसे संस्थानों को 50,000 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता भी प्रदान करेगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि लॉकडाउन होने के कारण ये संस्थान बाजार से नए संसाधन नहीं जुटा पा रहे हैं।

LTRO 2.0 क्या है

इस बार LTRO को LTRO 2.0 नाम दिया गया है, क्योंकि इस बार LTRO में सूक्ष्म वित्त और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों की तरलता जरूरतों पर ध्यान दिया जाएगा।

क्या होता है रेपो रेट

जब हमें पैसे की जरूरत हो और अपना बैंक अकाउंट खाली हो तो हम बैंक से कर्ज लेते हैं। इसके बदले हम बैंक को ब्याज चुकाते हैं। इसी तरह बैंक को भी अपनी जरूरत या रोजमर्रा के कामकाज के लिए काफी रकम की जरूरत पड़ती है। इसके लिए बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं। बैंक इस लोन पर रिजर्व बैंक को जिस दर ब्याज चुकाते हैं, उसे रेपो रेट कहते हैं।

रेपो रेट का असर क्या होता है

जब बैंक को रिजर्व बैंक से कम ब्याज दर पर लोन मिलेगा तो उनके फंड जुटाने की लागत कम होगी। इस वजह से वे अपने ग्राहकों को सस्ता कर्ज दे सकते हैं। इसका मतलब यह है कि रेपो रेट कम होने पर आपके लिए होम, कार या पर्सनल लोन पर ब्याज की दरें कम हो सकती हैं। अगर रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ा देता है तो बैंकों को पैसे जुटाने में अधिक रकम खर्च करनी होगी और वे अपने ग्राहकों को भी अधिक ब्याज दर पर कर्ज देंगे।

रिवर्स रेपो रेट क्या है

देश में कामकाज कर रहे बैंकों के पास जब दिनभर के कामकाज के बाद रकम बची रह जाती है, तो उस रकम को भारतीय रिजर्व बैंक में रख देते हैं। इस रकम पर आरबीआई उन्हें ब्याज देता है। भारतीय रिजर्व बैंक इस रकम पर जिस दर से बैंकों को ब्याज देता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं।

रिवर्स रेपो रेट में बदलाव का असर

जब भी बाजार में नकदी की उपलब्धता बढ़ जाती है तो महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। आरबीआई इस स्थिति में रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दें। इस तरह बैंकों के कब्जे में बाजार में बांटने के लिए कम रकम रह जाती है।

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