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भारतीय मौसम विभाग ने इस साल मॉनसून के दौरान पूरे सीजन में 100 प्रतिशत बारिश का अनुमान जताया है। इसका मतलब है कि 2020 में देश में मॉनसून सामान्य रहेगा। देश में 1 जून को केरल में दस्तक देगा। पश्चिम भारत में सितंबर में ही उसका लौटना शुरू हो जाएगा लेकिन कई जगहों पर अक्टूबर शुरू होने पर यह लौटेगा।

मौसम विभाग ने जून से सितंबर के दौरान देश में बारिश लाने वाले दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के इस साल सामान्य रहने का पूर्वानुमान जाहिर किया है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम राजीवन ने दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के पहले दीर्घकालिक अनुमान को जारी करते हुए यह जानकारी दी। डा. राजीवन ने बताया कि पिछले सालों की तरह देश में इस साल भी मॉनसून सामान्य रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए यह स्थिति मददगार साबित होगी।

आईएमडी के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के केरल तट पर दस्तक देने की तारीख पहले की तरह एक जून ही होगी। इसी तरह मानसून के पूरी तरह से देश से वापस होने की तारीख 15 अक्टूबर पहले की तरह बनी रहेगी।

अब मॉनसून को समझिए

मॉनसून मूलतः हिन्द महासागर एवं अरब सागर की ओर से भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आनी वाली हवाओं को कहते हैं जो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि में भारी बारिश कराती हैं। ये ऐसी मौसमी हवाएं होती हैं, जो दक्षिणी एशिया क्षेत्र में जून से सितंबर तक, अमूमन चार महीने तक सक्रिय रहती है।

हिन्दी व उर्दू के मौसम शब्द का अपभ्रंश है मॉनसून

इस शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल ब्रिटिश भारत में (वर्तमान भारत, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश) एवं पड़ोसी देशों के संदर्भ में किया गया था। ये बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से चलने वाली बड़ी मौसमी हवाओं के लिए प्रयोग हुआ था, जो दक्षिण-पश्चिम से चलकर इस क्षेत्र में भारी बारिश लाती थीं। ये शब्द हिन्दी व उर्दू के मौसम शब्द का अपभ्रंश है। मॉनसून पूरी तरह से हवाओं के बहाव पर निर्भर करता है। आम हवाएं जब अपनी दिशा बदल लेती हैं तब मॉनसून आता है। जब ये ठंडे से गर्म क्षेत्रों की तरफ बहती हैं तो उनमें नमी की मात्रा बढ़ जाती है जिससे बारिश होती है।

जून से सितंबर तक सक्रिय रहती है मॉनसून की हवा

भारत में मॉनसून हिन्द महासागर व अरब सागर की ओर से हिमालय की ओर आने वाली हवाओं पर निर्भर करता है। जब ये हवाएं भारत के दक्षिण पश्चिम तट पर पश्चिमी घाट से टकराती हैं तो भारत और आसपास के देशों में भारी वर्षा होती है। ये हवाएं दक्षिण एशिया में जून से सितंबर तक सक्रिय रहती हैं। वैसे किसी भी क्षेत्र का मॉनसून उसकी जलवायु पर निर्भर करता है। अमूमन मॉनसून की अवधि में तापमान में तो कमी आती है, लेकिन आर्द्रता (नमी) में अच्छी वृद्धि होती है। आद्रता की जलवायु विज्ञान में महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। यह वायुमंडल में मौजूद जलवाष्प की मात्र से बनती है और यह पृथ्वी से वाष्पीकरण के विभिन्न रूपों द्वारा वायुमंडल में पहुंचती है।

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