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February 26, 2020
Bihar Budget 2020-21 : बिहार में पेश हुआ ग्रीन बजट
February 26, 2020

24 फरवरी, 2020 को बिहार के उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने 14वां आर्थिक सर्वेक्षण 2019—20 की रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के अनुसार राज्य में कई उतार—चढ़ाव हुए हैं। आइए, जानते हैं आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के बारे में।

14वां आर्थिक सर्वेक्षण 2019—20 रिपोर्ट

— बिहार की प्रति व्यक्ति जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) मौजूदा कीमतों पर 47,541 रुपये है और निरंतर कीमतों पर 33,629 थी। बिहार में अर्थव्यवस्था के मुख्य विकास, जिन्होंने दो अंकों की वृद्धि दर्ज की और 2018-19 के दौरान बिहार की समग्र अर्थव्यवस्था के वास्तविक विकास में योगदान दिया, वे हैं हवाई परिवहन (36%), अन्य सेवाएं (20%), व्यापार मरम्मत सेवाएं (17.6%), सड़क परिवहन (14.0%), और वित्तीय सेवाओं (13.8%)

— सर्वेक्षण रिर्पोट के अनुसार राज्य का राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 2.68%, राजस्व अधिशेष जीएसडीपी का 1.34%, और राज्य सरकार का बकाया सार्वजनिक ऋण देयता वर्ष 2018-19 के दौरान जीएसडीपी का 32.34% था। 

— 2018-19 में बिहार की कुल राजस्व प्राप्ति 79 1,31,793 करोड़ और पूंजीगत प्राप्ति, 20,494 करोड़ थी। राज्य में राजस्व व्यय और कुल व्यय क्रमश: 89 1,24,897 करोड़ और 1,54,655 करोड़ थे। राजस्व प्राप्ति में 12.2% की वृद्धि हुई, जबकि राजस्व व्यय में पिछले वर्ष की तुलना में 2018-19 में 21.7% की वृद्धि हुई।

— 2016-17 में राज्य में अंडे का उत्पादन 111.17 करोड़ से बढ़कर 2018-19 में 176.34 करोड़ हो गया है। वहीं कुल मछली उत्पादन 2013—14 में 4.79 लाख टन था जो अब बढ़कर 2018-19 में 6.02 लाख टन हो गया है। इसी तरह, बिहार में परिचालन कृषि आधारित कारखानों की वार्षिक वृद्धि दर पिछले 10 वर्षों में 16.4% थी, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर यह केवल 3.3% थी। प्रमुख रोजगार पैदा करने वाले उद्योगों ने कहा कि 2017-18 के दौरान राज्य में काम करने वाले पुरुषों के लिए रिपोर्ट कृषि, वानिकी और मछली पालन (44.6%), निर्माण (17.1%), थोक और खुदरा व्यापार, वाहनों की मरम्मत (12.3%) थी। विनिर्माण (9.3%) और महिला श्रमिकों के लिए कृषि, वानिकी, मछली पकड़ने और शिक्षा प्रमुख रोजगार पैदा करने वाले उद्योग रहे हैं। 25% महिलाओं ने शिक्षा क्षेत्र में रोजगार पाया है। लोगों ने कामकाजी हुनर तलाशने के उद्देश्य से बने ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से बीते 5 वर्षों में 1,38,104 लोगों ने ट्रेनिंग ली। इनमें 45% पुरुष और 54% महिलाएं थीं। सरकारी आंकड़ा बताता है कि प्रशिक्षण पाए तीन—चौथाई लोगों को रोजगार मिल चुका है। 

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— राज्य में बिजली की प्रति व्यक्ति खपत 2012-13 में 145 kwh से बढ़कर 2018-19 में 311 kwh हो गई है। छह वर्षों में 114% की वृद्धि और बिजली की उपलब्धता 6-8 के औसत से बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में 20-22 घंटे बिजली की उपलब्धता हुई है 10—12 घंटे के बजाय। वहीं, शहरी क्षेत्रों में 22-24 घंटे तक बिजली की उपलब्धता रही है। राज्य में बिजली क्षमता की उपलब्धता 2018 में 3889 मेगावाट थी, जो बढ़कर 4767 मेगावाट हो गई 2019 में।

आर्थिक सर्वेक्षण क्या है
बजट से एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाता है। जो कि देश या किसी राज्य की आर्थिक स्थिति की दशा और दिशा को बताता है। मूल रूप से यह एक आधिकारिक रिपोर्ट होती है, जिसे इकनॉमिक सर्वे कहा जाता है। आर्थिक सर्वेक्षण में बताया जाता है कि वर्ष के दौरान विकास की प्रवृत्ति क्या रही। किन-किन योजनाओं को अमल में लाया और इनके क्या-क्या संभावित परिणाम सामने आने वाले हैं। इस तरह के सभी पहलुओं पर सूचना दी जाने के साथ अर्थव्यवस्था, पूर्वानुमान और नीतिगत स्तर पर चुनौतियों संबंधी विस्तृत सूचनाओं को भी इसमें शामिल किया जाता है। सर्वेक्षण कृषि और औद्योगिक उत्पादन, बुनियादी ढांचे, रोजगार, धन की आपूर्ति, कीमतों, आयात, निर्यात, विदेशी मुद्रा भंडार और अन्य प्रासंगिक आर्थिक कारकों के रुझानों का विश्लेषण करता है, जिसका विकास पर असर पड़ता है और बजट में ध्यान देने की आवश्यकता होती है। हालांकि, संविधान सरकार को आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने के लिए बाध्य नहीं करता है। लेकिन वर्षों से केंद्रीय बजट से पहले हर सरकार के लिए आर्थिक सर्वेक्षण पेश करना आम बात हो गई है। 

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